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अन्यवैज्ञानिकSCIENTIST

सुरी भगवनतम की जीवनी - Biography of Suri Bhagvanatam in hindi jivani

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नाम : सुरी भगवनतम

जन्म दि: 14 अक्टूबर 1909

टिकाण : अग्रिपल्ली, मद्रास प्रेसीडेंसी, ब्रिटीश राज

व्यावसाय : वैज्ञानिक प्रशासक

मरगए : 6 फरवरी 1989


प्रारंभिक जीवन :


        सुरी भगवन्तम का जन्म 14 अक्टूबर 1909 मे हुवा था | उनका जन्म आंध्र प्रदेश के एक गांव अगिरीपल्ली मे हुवा था | उनका प्राथमीक शिक्षण गुडीवाडा मे हुवा था | फिर उन्होंने मद्रास विश्वाविदयालय के तहत, हैदराबाद के निजाम कॉलेज से भौतिकी मे स्त्रातक की डिग्री प्राप्ता कि थी | सी वी रमन की खोजो से प्रभावित होकर भगवन्तम कलकत्ता चले गए थे | और 1928 मे उनके साथ जुउ गए थे | रमन ने भगवन्तम को अपने शोध कार्या को आगे बढाने के लिए अपने सहयोगी के रुप मे चुना था |


        उन्होने इस अवधि के दौरान मद्रास विश्वाविदयालय से विज्ञान मे स्त्रातकोत्तर डिग्री हासिल कि थी | 1933 मे जब रमन भारतीय विज्ञान संस्थान मे इसके निदेशक के रुप मे शामिल हुए थे | रमन ने भगवन्तम को आंध्र् विश्वाविध्यालय वाल्टेयर को भौतिकी मे व्याख्याता के रुप मे शामिल करने कि सिफारिश कि थी | और उस अवधि के दौरान भगवन्तम एक लोकप्रिय व्याख्याता बन गए थे |


        और 1938 मे प्रोफेसर और विभाग के प्रमूख बनने के लिए उठे थे | भगवनतम भारतीय स्वातंत्रता के बाद , 1948 और 1949 के बीच वी के कृष्ण मेनन के तहत लंदन मे भारतीय उच्चायोग के वैज्ञानिक सलाहकार के रुप मे शामिल हुए थे | उन्होंने कई युरोपीय देशों की यात्रा कि और वैज्ञानिक व्याख्यान दिए थे |


कार्य :


        सुरी भगवनतम एक भारतीय वैज्ञानिक और प्रशासक थे | वो एक उस्मानिया विश्वाविदयालय के कुलपति थे | और भारतीय विज्ञान और रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन के निदेशक थे | वो युनिवर्सिटी कॉलेज आंध्र विश्वाविदयालय के प्रिंसिपल थे | 1957:1962 के बीच भारतीय विज्ञान संस्थान के निदेशक थे |


        भ्गवन्तम 1970:76 के बीच वर्तमान विज्ञान संघ के अध्याक्ष थे | उन्होने द थ्योरी ऑफ ग्रूप्सा और इसके भौतिक पुस्तक लिखा था | यह पूस्ताक तीन संस्करणों मे प्रकाशित हुई थी | और रुसी मे इसका अनुवाद किया गया था | उन्हे 1952 मे वाइस चांसलर चुना गया था | और 1962 मे भारत चीनी युध्द के बाद जब YB चवहाण रक्षा मंत्री थे | भारत मे प्रयोगशालाओं की श्रृखला स्थापित करने मे महत्वापूर्ण भूमिका निभाई थी |