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नाम : सुज देव
जन्म दि : 17 जून 1923
ठिकाण : चकवाल, पंचाब, ब्रिटीश राज
पिता : हरि चंद लाला
व्यावसाय : कार्बनिय रसायनज्ञ, आकदमिक शोधकर्ता और लेखक
प्रारंभिक जीवन :
सुज देव का जन्म 17 जून 1923 मे हुवा है | उनका जन्म चकवाल पंचाब ब्रिटीश राज मे हुवा है | उनके पिता हरि चंदलाला और मॉ मायावंती थे | सुज देव ने 1943 मे दयानंद एंग्लो वैदिक कॉलेज, पंजाब विश्वाविध्यालय के लाहौर से सम्मान के साथ स्त्रातक पुरा किया है | और 1945 मे उसी संस्थान मे मास्टार डिग्री एमएससी हासील कि है | फिर देव भारतीय विज्ञान सस्थान मे शामिल हो गए है | बैंगलोर आयआयएससी एक शोध सहयोगी के रुप मे लगाया है |
सुज देव ने आईआईएससी मे प्रख्यात प्राकृतिक उत्पादों के रसानज्ञ प्रफुल्ला चंद्र गुटा के अधीन अध्यायन किया है | और 1948 मे सुज देव ने पीएचडी उपाधी प्राप्ता कि है | उन्होंने डॉक्टरेट लेने के बाद, उन्होंने जॉन डी के साथ मैशायुसेटस इंस्टीटयूट ऑफ टेक्नोलॉजी मे पोस्टा डॉक्टरल शोध किया था | 1953 से 1959 तक कार्बनिक रसायन विज्ञान मे एक व्याख्याता के रुप मे जारी रहे थ | इलिआस जेम्सा कोरी के तहत 1957 – 58 मे अर्बाना शैम्पेन विश्वाविदयालय मे इलिनोइस विश्वाविदयालय मे एक शोध सहयोगी के रुप मे एक संक्षिप्त कार्यकाल के साथ थे |
1960 मे आईआईएससी से डीएससी की उपाधि प्राप्ता की है | और इसके बाद उसी वर्ष राष्ट्रीय रसायन प्रयोगशाला, पुणे शामिल हो गए है | जब वो कार्बनिक रसायन प्रभाग के प्रमुख थे | सुज देव को 1974 मे नंदसरी मे मालती केम रिसर्च सेंटर का निदेशक नियुक्त किया गया है | जहाँ उन्हेाने 1988 तक काम किया है |
1989 मे उन्हेाने भारतीय प्रौघोगिकी संस्थान, नई दिल्ली मे प्रेवश लिया था | आईएनएसए एसएन बोस रिसर्च प्रोफेसर के रुप मे काम किया हे | 1994 मे दिल्ली विश्वाविध्यालय के डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर सेंटर फॉर बायोमेडिकल रिसर्च मेि शिफट किया गया है | जहाँ सुख देव विजिटिंग प्रोफेसर है |
कार्य :
सुज देव भारतीय कार्बनिक रसायनस आकदमिक, शोधकर्ता और लेखक है | जो एक चिकित्सीय और पोषण एजेट के रुप मे इस्तेमाल किए जाने वाले पौधेव्युत्पन्ना स्टेरॉयड गुग्यूलस्टोरान के विकास मे उनके योगदान के लिए जाने जाते है | सुज देव ने जैव चिकित्सा विज्ञान और प्राकृतिक उत्पादों के रसायन विज्ञान मे उन्नात शोध किया है |टेरपंनोइडस पर शोध मे शामिल हुए थे | उन्होंने सेसक्की और डिपंपेनोइडस मे नए कंकाल प्रकारों की खोज की है |
सुज देव ने उनके शोधो अधार पर दो नियम प्रस्तावित किए है | निरपेक्षा Streaochemistry बायोजेमिटक नियम विदेश जैविक सामग्री विदेश माध्यामिक चयापचयों का उत्पादन करते है | उन्हेांने लाख, टर्पेन्टाइन सेंडरस देवडा और गुग्गुल कमिफोर वाइटी जैसे भारतीय औषधीय पौधो पर एचएसआई शोध का एक भाग केंद्रीत किया है | उनके शोधे ने उने 55 पेटेंट अर्जित किए है | और उनके काम के शरीर को 290 से अधिक वैज्ञानिक लेखो मे प्रलेखित किया गया है |
उपलब्धि :
1) 1949 मे इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ साइंस का सुदबोरो मंडल|
2) 1964 मे शांति स्वरुप भटनागर पूरस्कार|
3) 1964 मे प्रौघोगिकी श्रेणीयों मे सर्वोच्चा भारतीय सम्मान|
4) 1970 मे आचार्य पीसी रे पूरस्कार|
5) 1979 मे विश्वकर्मा पदक|
6) 1980 मे अनैस्ट गुएन्थर पूरस्कार से सम्मानित किया |
7) पूर्व छात्र पूरस्कार के लिए चुना गया |
8) VASVIK औघोगिक अनुसंधान पूरस्कार|
9) फंडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री का FICCI अवार्ड|
10) 1980 मे INSA के प्रोफेसर टीआर शेषाद्री सातवें जन्मदिवस स्मरणोत्सव पदक|
11) 1987 मे मेघनाद सहा पदक|
12) तिसरे विश्वाविज्ञान अकादमी पूरस्कार|
13) 1992 मे श्रीनिवासन रामानुसजन जन्म शताब्दी पूरस्कार|
14) आसीएस लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड|
15) सीआएसआय लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड|
16) 2008उ मे पदम भूषण पूरस्कार|