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नाम : सुहास पांडूरंग सुखतमे
जन्म दि : 5 नवंबर 1938
ठिकाण : बडौदा, महाराष्ट्र, भारत
पत्नी : शोभा सुखमेय
व्यावसाय : वैज्ञानिक
प्रारंभिक जीवन :
सुहास पांडूरंग सुखतमे का जन्म 5 नवंबर 1938 को हुवा है | उनका जन्म बडौदा महाराष्ट्र,भारत मे हुवा है | सुखतमे के पीता का नाम पांडूरंग वासुदेव सुचेतमे था | और मॉ का नाम इंदूमती सुखतमे था | सुखातमे ने 1958 मे बनारस हिंदू विश्वाविदयालय से इंजिनियरिंग मे स्त्रातक किया है |
और मैसाचुसेटस इंस्टीटयूट ऑफ टेक्नोलॉजी मे उच्चा अध्यायन किया है | सुहास सुखातमे ने 1960 मे मास्टार डिग्री एसएम पूरी कि है | और 1961 मे इंजिनियरिंग MEACH E मे उच्चा डिग्री हासील कि है | सखतमे ने 1964 मे डॉक्टरेट कि डिग्री Sc D प्राप्ता कि है |
सुहास सुखतमे MIT मे रहने के दौरान 1959 :64 के दोरान एक शोध सहायक के रुप मे काम किया है | वो डायनाटेक कॉरपोरेशन मे चले गए जहाँ उन्होंने एक वर्षे तक स्टाफ इंजिनियर के रुप मे काम किया है | सुदातमे ने 2000:2005 तक भारत सरकार के परमाणू ऊर्जा नियामक बोर्ड के अध्याक्ष के रुप मे काम किया है |
कार्य :
सुहास सुखतमे एक भारतीय वैज्ञानिक, शिक्षक, लेखक और भारत के परमाणू ऊर्जा नियामक बोर्ड के पूर्व अध्याक्ष है | जो गर्मी हस्तांतरण और ऊर्जा प्रौघोगिकियों मे अपनी विशेषज्ञता के लिए जाने जाते है | 1970 मे प्रोफेसर के रुप मे कार्य किया है | 1995 मे संस्था के निदेंशक बन गए है | 1982:83 के दौरान उन्होंने शैक्षणिक वर्षे मे आयावा राजया विश्वाविदयालय मे एक संक्षिप्ता प्रोफेसर के रुप मे काम किया है |
सूहास सुखतमे इंडियन सोसायटी फॉर हिट एंड मांस ट्रांसफर ISHMT और सोलर एनर्जी सोसाइटी ऑफ इंडियन के सदस्या है | भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी परिषद के पूर्व सदसया है | भारतीय विज्ञान संस्थान, बैंगलोर परमाणू ऊर्जा विभाग के परमाणू विज्ञान अनुसंधान बोर्ड के प्रचार कार्य किया है |
और मूल्यांकन समित के सदस्या के रुप मे कार्य किया है | सुहास ने 70 से अधिक वैज्ञानिक पत्रों और तीन पुस्ताकों के लेखक है | उन्होंने मुंबई स्थित संस्थानों शैलेश जे मेहता स्कुल ऑफ मैनेजमेंट और कंवल रेखा स्कुल ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के निर्माण मे सहायता कि है |
सूहास सुखतमे की शादी एक मेडिकल डॉक्टार शोभा से हुई है | उनके दो बच्चे है | गोरव जो दक्षिणी केलीफोर्निया विश्वाविदयालय मे फैकल्टी के सदस्या है | और दुसरा जय जो विस्कॉन्सिन मैडिसन विश्वाविदयालय मे पढाते है |
उपलब्धी :
सुखतमे को 1958 मे बनारस हिंदू विश्वाविदयालय व्दारा युनिवर्सिटी परिक्षा ओ मे ऑप करने के लिए प्रिंस ऑफ वेल्सा गोल्डा मेडल से सम्मानित किया गया था | 1983 मे उन्हेाने वैज्ञानिक और औघोगिक अनुसंधान परिषद से विज्ञान और प्रौघोगिकी के लिए शांति स्वरुप भटनागर पूरस्कार प्राप्ता किया है | 2001 मे उनहें ओम प्रकाश भसीन फाउंडेशन की और से ओम प्रकाश भसीन पूरस्कार प्रदान किया गया है | और भारतीय प्रौघोगिक संस्थान, मुंबई से लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड मिला है |
2001 मे भारत सरकार व्दारा प्रदमश्री के नागरिक सम्मान से सम्मानित कीया गया है | सुखतमे ने भारतीय राष्ट्रीय अकादमी नासा मे 2005 मे दौलत सिंह कोठारी मेमेारियल अवार्ड मिला है | जहाँ एक निर्वचित फेलो है | और इंडियन नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग और नेशनल ऑफ सांइसेज, भारत के एक निर्वाचित फेलो भी है | वे सिग्मा सोसायटी के एक निर्वाचित सदस्या है और तकनीकि शिक्षा के लिए इंडियन सोसाइटी के फेलो हे |