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वैज्ञानिक

सुधामॉय घोष की जीवनी - Biography of Sudhamoy Ghosh in hindi jivani

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नाम : सुधामॉय घोष

जन्म दि : 13 जनवरी 1890

ठिकाण : चारसोलर, ढाका जिला, बंगाल प्रेसीडेंसी, ब्रिटीश राज

पिता : रसिक लाल घोष

व्यावसाय : भारतीय जैव रसायनविद, प्राकृतिक उत्पाद रसायनज्ञ और औषधविदू


प्रारंभिक जीवन :


        सुधामॉय घोष 13 जनवरी 1890 को जन्म हुवा था | उनका जन्म ढाका जिले के चारसोलर गाव मे हुवा था | उनके पिता रसीकलाल घोष एक सिविल सेवक थे और मॉ का नाम कुसूम कुमारी था | घोष ने हाई स्कूल से मैट्रिक की परिक्षा उत्तीर्ण हुए थे | अपनी इंटरमीडिएट की डिग्री पूरी की थी | 1910 मे उन्होने ढाका कॉलेज मे रसायन विज्ञान मे स्त्रातक की उपाधि प्राप्ता कि थी | उन्हेांने मास्टार डिग्री 1912 मे पूरी कि थी |


        सूधामॉय घोष ने 1942 मे निर्मला गूहा से शादी कि थी | और उनकी दो बेटीया एक इंजिरा ऑर मंजू है | उन्होंने 1913 मे डॉक्टरल अध्यायन को आगे बढाने के लिए एडिनबर्ग विश्वाविदयालय को छात्रवृत्ति प्राप्ता कि थी | उन्होंने एनि मे उन्होने कुल शर्करा के ऑप्टिकल रोटेशन पर जेम्सा वॉकर के बाद वे लियोनार्ड रोजर्स के तहत कलकत्ता मेडिकल कॉलेज से एक शोध रसायनज्ञ बन गए थे |


        जो उष्णकटिबंधिय चिकित्सा मे एक प्रमूख शोधकर्ता थे | उन्होंने 192 मे प्रोफेसर और रसायन शास्त्रा के प्रमूख के रुप मे नव स्थापित कलकत्ता स्कुल ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन के संकाय मे प्रवेश लिया था | और अपनी सेवानिवृत्ती तक इस पद को धारण किया था |


कार्य :


        आपने करियर के दौरान घोष ने आपने रासायनिक गुणों के लिए भारतीय औषधीय पौघो की जांच की थी | उनमे से बांहराविया डिफयूसा थे | जिसमे से उन्होंने एल्कालॉइड पुनर्वनाविन और सिडा कॉडिकोलिया को अलग किया था | जिसमे छात्रों ने अपने शोध के दौरान कई मए अल्कलॉइडो को अलग किया था | जिसमे होल्शरेा इंटीडिसेंट्रिका की छाल से खुरचिन और कुराचिसिन, साओसुरिया लैप्पा से ससुराइन और हायलोफोस अस्थामाटिक से टायलरहोराइट शामिल है |


        घोष् को दो बार 1929 और 1942 मे फिजियोलॉजी या मेडिसीन के नोबेल पुरस्कार के लिए नामित किया गया था | अवसरों पर उन्होंने सर उपेन्द्रनाथ ब्रहमचारी को पूरस्कार के लिए नामांकित किया गया था | 1947 मे अपनी सेवानिवृत्ती के बाद, घोष को पश्चिम बंगाल लोकसेवा आयेाग मे नियुक्ता किया गया था |


उपलब्धि :


1) 1915 मे एफसीएस केमिकल सोसाइटी के साथी|

2) 1920 मे एफआरएससी रॉयल सोसायटी ऑफ एडिनबर्ग के साथी|

3) 1926 मे डॉयले फमाजुटिस्के गेस्लेचाफट के फेलो|

4) 1931 मे कलकत्ता स्कुल ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन का मिंटो मेडल|

5) 1936 मे एफआरआयसी रॉयल इंस्टीटयूट ऑफ केमिस्ट्री के फेलो|

6) 1945 मे एफएनए भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के साथी|

7) 1945 मे एमबीई बर्थडै ऑनर्स द ऑर्डर ऑफ द ब्रिटीश एम्पायर के सदस्या |