Advertisement
नाम : सुब्रहमण्यान चंद्रशेखर
जन्म दि: 19 अक्टूबर 1910
ठिकाण : लाहौर, पंजाब, ब्रिटीश भारत
पत्नी : ललीता देविस्वामी
व्यावसाय : राल्फ एच फाउलर आर्थर एडिंग्टन
प्रारंभीक जीवन :
सुब्रमण्याम चंद्रशेखर का जन्म 19 अक्टूबर 1910 को हुवा था | उनका जन्म लाहौर मे पंजाब ब्रिटीश भारत हुवा था | उनका जन्म एक तामिल अयर परिवार मे हुवा था | चंद्रशेखर की दो बडी बहने थी एक राजलक्ष्मी और बालापर्वती थी | ओर उनको तीन भाई थे, विश्वानाथन, बालकृष्णान और रामनाथन और छोटी बहन शारदा विघा, सावित्री और सुंदरी थी | और उनकी मॉ बौध्दिक गतिविधियों के लिए समर्पित थी | उन्होंने हैनरिक इबसेना की ए डॉल् हाऊस का तामिल मे अनुवाद किया था | इनका परिवार 1916 मे लाहौर से इलाहाबाद आ गया था | और आखिरकार 1918 मे मद्रास मे बस गया था |
चंद्रशेखर को बारा साल की उम्र तक घर पर पढाया जाता था | मध्या विदयालय मे पिना उन्हे गणित और भौतिकी पढाते थे | और उनकी मॉ उन्हें तामिल पढाती थी | बाद मे उन्हेांने 1922 से 1925 के दौरान हिंदू हाई स्कूल, टिप्लिकेज्ञ मद्रास मे पढाई कि थी | इसके बाद उन्हेांने 1929:1930 तक मद्रास प्रेसीडेंसी कॉलेज मे पढाई कि थी |
उन्होंने अपना पहला पेपर 1929 मे द कॉम्पटन स्कैटरिंग एंड द न्यू स्टेटिस्टिक्सा मे अनौल्डा सोमरफैल्ड बीएससी स्त्रातक की उपाधि प्राप्ता कि थी | जुलाई 1930 मे चंद्रशेखर को कैम्ब्रिज विश्वाविघ्यालय मे स्त्रातक की पढाई करने के लिए भारत सरकार की छात्रवृत्ति से सम्मानित किया गया था | जहॉ उन्हें ट्रिनिटी मे भर्ती कराया गया था | अपनी इंग्लैड यात्रा के दौरान चंद्रशेखर ने अपना समय व्हाइट बौने सितारो मे पतित इलेक्ट्रॉन गैस के सांख्यिकिय यांत्रिकी काम करने मे बिताया था |
9 अक्टूकर को चंद्रशेखर ने 1933:1937 की अवधि के लिए ट्रिनिटी कॉलेज मे एक पूरस्कार फैलोशिप के लिए चुना गया था | 16 साल पहले श्रीनिवास सामानुजन के बाद ट्रिनिटी फैलोशिप प्राप्ता करने वाला दुसरा भारतीय बना था | च्रदशेखर ने सितंबर 1966 मे ललिता डोशविस्वामी से शादी की थी | वो उनसे प्रेसिडेंसी कॉलेज मे एक साथी छात्र के रुप मे मिले थे चंद्रशेखर सी वी रमन के भतीजे थी | जिनहे 1930 मे भौतिकी के नोबेल पूरस्कार : से सम्मानित किया गया था | 1953 मे अमेरिक के एक स्वाभाविक नागरिक बन गए थे | कई लोग उन्हें गर्म सकारात्माक उदा बेबाब सावधानीपूर्वक और बहस के लिए खुला मानते थे |
कार्य :
चंद्रशेखर का सबसे उल्लेखनीय काम जयोतिषीय चंद्रशेखर की सीमा पर है | च्रद्रशेखर ने पहली बार 1930 मे अपने स्त्रातक अध्यायन के लिए भारत से कैब्रिज इंग्लैड के लिए पहली यात्रा के दौराण गणाना की थि | एक भारतीय मूल के एक अमेरिकी खगोल वैज्ञानिक थै | जिन्हेांने संयुक्त राजया अमेरिका मे अपना व्यावसायीक जिवन बीताया था |
उन्हेांने दिखाया कि एक सफेद बोने का प्रण्यामान सुर्य के च्रदेशखर सीमा 144 गुना अधि क नही हो सकता है | च्रदशेखर ने गेलक्टिक सेंटर के बारे मे घुमते हुए सितारों पर मिल्की वे के भतर गुरुतवाकर्षण क्षैत्र के उतार चढाव के प्रभावों पर विचार करके पहले जन ऑर्ट और अन्या व्दारा उल्लीखित तारकीय गतिकी के मॉडल को संबंधित किया गया था |
चंद्रशेखर अपने पूरे करियर के लिए शिकागो विश्वाविदयालय मे रहे थे | उन्हेांने 1941 मे एसोसिएट प्रोफेसर के रुप मे पदोंन्नात किया गया था | और केवल 33 साल की उम्र मे दो साल बाद प्रोफेसर बन गये थे | 1952 मे वो सैघ्दांतीक खगोल भौतिकी के मॉडर्न डी हुल प्रतिष्ठित सेवा के प्रोफेसर बने थे | जो प्रिसटन युनिवर्सिटी ऑब्जर्वेटरी के निदेशक के रुप मे प्रख्यात अमेरिकी खगोलशास्त्री थे |
उपलब्धी :
1) 1944 मे रॉयल सोसायटी एफआरएस का एक साथी चुना गया |
2) 1949 मे हेनरी नॉरिस रसेल लेक्चरशिप|
3) 1952 मे ब्रूस मेडल|
4) 1953 मे रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसायटी का स्वर्ण पदक|
5) 1957 मे रमफोर्ड पूरस्कार : कला और विज्ञान अकादमी|
6) 1968 मे पदम विभूषण|
7) 1971 मे नेशनल अकेडमी ऑफ साइंसेज के हेनरी ड्रेपर मेडल|
8) 1984 मे रॉयल सोसायटी के कोपले मेडल|
9) 1988 मे इंटरनेशनल एकेडमी ऑफ साइंस की मानद फेलो|
10) 1989 मे गॉर्डन जे लाईग अवार्ड|
11) हम्बोल्ट पूरस्कार |