Advertisement
नाम : सुब्बारमैया मिनाक्षीसुंदरम
जन्म दि. 12 अक्टूबर 1913
ठिकाण : त्रिचुर
पिता : सलेम से
व्यावसाय : गणितज्ञ
प्रांरभिक जीवन :
सुब्बारमैया मिनाक्षीसुंदरम का जन्म 12 अक्टूबर 1913 मे हुवा था | उनका जन्म त्रिचुर अब उसे त्रिशूर मे केरल राजया, भारत मे हुवा था | उनके पिता का नाम सलेम से था | उन्हें दोस्तों व्दारा मिनाक्षी के रुप मे जाना जाता था | और उन्हें अपने माता पिता व्दारा जिजा कहा जाता था | उनके पिता पिता सलेम से एक ब्रिटीश राज सरकार मे एक सैनिटरी इंजिनियर के रुप मे नौकरी करते थै |
उनके मॉ ने सलेम से से शादी कि थी | उनकी पहिली संतान सुब्बारमैया मिनाक्षीसुंदरम थी | मिनाक्षीसुंदरम के दो छोटे भाई थै | उनके पहले साल केरल मे बीते थे, जहाँ उन्होंने मलयालम भाषा सीखी थी | लेकिन परिवार अपने पिता की नौकरी के कारण मद्रास चले गए थे | उस समय से उसके परिवार ने तामिल भाषा बोला चालु कियागया था | मिनाक्षीसुंदरम ने 1919 मे मद्रास के पेरम्बूर मे कैलावाला शमानुजम चेट्टी हाई स्कूल मे प्रवेश किया था | उनके दो छोटे भाई रामकृष्णा मठ स्कूल मम्बलम, मद्रास पढे थे |
मिनाक्षीसूंदरम ने सीआरसी हाईस्कूल मे अपनी शिक्षी रखी थी | 1929 मे मध्यामिक स्कूल छोडने के प्रमाण पत्र के साथ स्त्रातक हाई स्कुल मे प्रवेश लिया था | हाईस्कूल से स्त्रातककरने के बाद मिनाक्षीसुंदरम ने पचैयप्पा के कॉलेज मद्रास मे पढाई कि थी | तब वो एक बुजूर्ग महिला के स्वामित्वा वाले स्वातंत्र वाले स्वातंत्र घर मे एक पेइंग पोस्टा गेस्ट के रुप मे रहते थै |
पचायप्पा के कॉलेज मे इंटरमीडीएट के बाद, 1931 मे मिनाक्षीसुंदरम ने गणित मे बीए की पढाई करने के लिए मद्रास कॉलेज मे प्रवेश लिया था | इस कॉलेज कि मद्रास विश्वाविदयालय की प्ररीक्षाओं मे प्रथम श्रेणी के छात्रों के लिए एक उत्कृष्ठा प्रतिष्ठा थी | और 1934 मे मिनाक्षीसुंदरम ने गणित मे प्रथम श्रेणी के सम्मान से सम्माणित किया गया था |
कार्य :
मिनाक्षीसूंदरम को मद्रास विश्वाविदयालय व्दारा एक्सटेंशन लेक्चर का एक कोर्स देने के लिए आमंत्रित किया गया था | उन्हें आंध्र विश्वाविदयालय के गणितीय भौतिकी विभाग मे व्याख्याता के रुप मे नियुक्ता किया गया था |1966 मे इसका नाम बदलकर अनूप्रयूक्ता गणित विभाग कर दिया गया था | 1943 मे वो इंडियन मैथमेटिकल सोसाइटी के सदस्या बने थे | उनका प्रकाशन रिकॉर्ड 1942 मे प्रकाशित होने वाले तीन पत्रों और 1943 मे पांच के साथ बकाया था | यह घटना जो मिनाक्षी सुंदरम के विकास मे बहुत महत्वापूर्ण थी | क्योंकि इंस्टीटयूट फॉर एडवांस्ड स्टडी, प्रींसटन, युएसए के लिए एक निमंत्रण था |
मिनाक्षीसुंदरम दिसंबर 1946 मे मई 1948 तक इंस्टीटयूट फॉर एववांस स्टडी मे थे | 1950 मे आंध्र विश्वाविदयालय के गणित भौतिक विभाग मे प्रोफेसर बन गऐहै | 1951 मे मिनाक्षीसूंदरम को गणितीय भौतिकी विभाग के प्रमूख के रुप मे नियुक्ता कीया गया था | और उसी वर्षे उन्होंने टाटा इंस्टीटयूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च, बॉम्बे मे आयोजित एक ग्रीष्मकालीन संगोष्ठी मे भाग लिया था | उनहें कोमाखेालू चंद्रशेखर 1920:2017 व्दारा आमंत्रित किया गया था |
जिन्होंने टाटा इंस्टीटयूट ऑफ फंडामेटल रिसर्च के गणित के स्कूल को उत्कृष्टता के विश्वास्तार के केंद्र मे बदल दिया था | इस यात्रा के कारण मिनाक्षीसुंदरम और चंद्रशेखर के बीच सहयोग हुवा और उन्होंने 1952 मे ऑक्साफोर्ड युनिवर्सिटी प्रेस व्दारा प्रकाशित पुस्तक टिपिकल मीन्सा का सहलेखन किया गया था | 15 अगस्ता 1958 को मिनाक्षी सुंदरम को भारतीय विज्ञान अकादमी के लिए चुना गया था | उनहें 1961 मे आंध्र विश्वाविदयालय मे भारतीय सोसायटी सम्मेलन का आयोजन किया था | 1966 मे उन्हें शिमला मे नवनिर्मीत इंस्टीटयूट फॉर एडवांस्डा स्टडीज मे प्रोफेसर नियुक्ता किया गया था |