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वैज्ञानिक

श्रीनिवास किशनराव सैदापूर की जीवनी - Biography of Srinivas Kishanrao Saidapur in hindi jivani

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नांव : श्रीनिवास किशनराव सैदापूर

जन्म दि 7 मार्च 1947

ठिकाण : कर्नाटक

 व्यावसाय : उभयचर के तुलनात्माक एंडोक्रिनोलॉजी कशेरुक के प्रजनन जीव विज्ञान.


प्रांरभिक जीवन :


        श्रिनिवास किशनराव सैदापूर 7 मार्च 1947 को हुवा था | उनका जन्म कर्नाटक भारत मे हुवा था | श्रीनिवास सैदापूर ने अपनी सभी कॉलेज की पढाई कि, पोस्टा डॉक्टरल कि पढाई को छोडकर कर्नाटक विश्वाविदयालय मे की थी | जहाँ से उन्होंने स्त्रातक मास्टार और डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्ता कि थी | अपनी मास्टार डिग्री पूरी करने के बाद उन्होंने प्राणीशास्त्रा के व्याख्याता के रुप मे विश्वाविदयालय मे प्रवेश किया था |


        और अपना पुरा शैक्षि शैक्षणिक जीवन 2010 मे सुपरनेचुरिंग मे बिताया था | इस बीच मे उन्हाोंन पीएचउी की उपाधि प्राप्ता कि थी | और विश्वाविदयालय मे डॉक्टरेट की पढाई पुरी कि थी | और 1976:1979 के दौरान कैनसस अस्पताल एक अलेकजेडर वॉन हम्बोल्ट फैलोशिप पर शोध किया था | उन्होंने 1989:1990 के दौरान मैन्ज विश्वाविदयालय मे शोध किया था |


        श्रीनिवास किशनराव सैदापूर ने कर्नाटक विश्वाविदयालय मे उन्होंने 1988 से एक प्रोफेसर के रुप मे सेवा की जब तक की उन्हे 2006 मे विश्वाविदयालय के कुलपति के रुप मे नियुक्त नही किया गया था | एक पद जो उन्हेांने 2010 तक आयोजित किया गया था | जापान मे 1995 मे रुहर विश्वाविदयालय बोचुम और जर्मनी मे बुर्जबर्ग विश्वाविदयालय मे 2004 मे भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी ऑर डॉयरचे फॉर्सचुंग्समेमेइनशाफट डीएफजी के एक आईएनएसए डीएफजी एक्सचेंज प्रोग्राम के साथी के रुप मे दो छोटे स्टेट थे |


कार्य :


        श्रीनिवास किशनराव सैदापूर एक भारतीय प्रजनन जीविज्ञानी अकादमिक और कर्नाटक विश्वाविदयालय के पूर्व कुलपति है | वह उभयचर के तुलनात्माक एंडोक्रिनोलॉजी और कशेरुक के प्रजनन जीव विज्ञान पर अपने अध्यायन के लिए जाना जाता है | और भारतीय विज्ञान आकादमी भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान आकादमी राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, भारत और विश्वा का एक चुना हुआ है |


        उभयचर के तुलनात्माक एंडोकिृजोलॉजी पर अपने शोधो को ध्यान मे रखते हुए, सैदापूर ने उष्णकटिबंधीय अरावन और उनके नियंत्रण तंत्र व्दारा विभिन्ना प्रकार की प्रजनन प्रकिृया को समझााया था | उनके अध्यायन से यह पता चला है कशेरुकियों के प्रजनन जीव विज्ञान कि समझा को व्यापक किया गया है | और इंडियन बुलफ्रॉग पर अपने शोधो को केंद्रीत करते हुए उनहोंने पूर्वनिर्धारित सेक्सा के मेंढको के उत्पादन के लिए युग्मकजजब पध्दतियों का प्रस्ताव रखा था |


        उनकी अध्यायन मे भी उनके जाली तकनीकों खाघ पहचान परिजन का पता लगाने और शिकारी संबंधो के संबंध मे अरुण हैडपोल और एग्रीमिउ छिपकली के व्यवहार परिस्थितिकी को कवर किया गया था | उनहोंने सरीस के कैप्टिव प्रजनन के लिए नए तारीके विकसित किए | शैक्षणिक मार्चे पर यह उनके नेतृत्वा मे था |


        कर्नाटक विश्वाविदयालय ने आणविक जीव विज्ञान पशू व्यावहार और विकासवादी जीवविज्ञान पर नए शैक्षणिक पाठयाक्रम पेश किए था | INSA परिषद के पूर्व सदस्या थे | 2012:14 के दौरान इसके उपाध्याय के रुप मे कार्य किया है | उन्हेांने कई खेल भी प्रकाशित किए है | और उनहोंने डॉक्टरल शोध मे 13 विव्दानों का उल्लेख किया है |


उपलब्धी :


1) 1991 मे सर्वोच्चा भारतीय विज्ञान पूरस्कारों मे से एक शांति स्वरुप भटनागर पूरस्कार से सम्मानित किया गया है |