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वैज्ञानिक

श्रीनिवास रामचंद्र कुलकर्णी की जीवनी - Biography of Srinivas Ramchandra Kulkarni in hindi jivani

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नाम : श्रीनिवास रामचंद्र कुलकर्णी

जन्म दि: 4 अक्टूबर 1956

ठिकाण : कुरुंटवाड 

माता : विमला कुलकर्णी

व्यावसाय : अमेरिका के एक खगोलविद है |


प्रांरभिक जिवन :


        श्रीनिवास रामचंद्र कुलकर्णी का जन्म 4 अक्टूबर 1956 को हुवा था | उनका गाव कुरुंटवाड है | और उनका माधव ब्राम्हण परिवार मे जन्म हुवा | उनके परिवार की भाषा कन्नाड है | उनके पिता का नाम डॉ. रामचंद्र कुलकर्णी वो एक हुब्ली मे स्थित एक सर्जन थे और उनकी मॉ का नाम विमाला कुलकर्णी वो एक समर्पित ग्रह निर्माता थी | श्रीनिवास को तीन बहने है |


        श्रीनिवास कुलकर्णी और उनकी बहने कर्नाटक के हुबली मे स्थानिक स्कुलो मे अपनी शिक्षा प्राप्ता कि है |1987 मे कैलिफोर्निया इंस्टीटयूट ऑफ टेक्नोलॉजी मे संकाय के रुप मे एक डिग्री हासील की उनकी वेबसाई के नूसार उन्होने 2016 मे अंत तक 64युवा का उल्लेख किया है | अवलोकनन मे तरंग दैर्ध्य कि विस्तूत श्रृंखला का उपयोग करने खगोल विज्ञान के भितर नए उपक्षेत्र उत्पन्ना करते है | इसलिए कुलकर्णी उन महत्वापूर्ण खोजो को बनाने के लिए जाने जाते है |


        एडीएससे पता चला की उनकी कागजात क्षेत्रो को कवर करते है | 1) मिल्कि वे गैलेक्सी के H1 अवशोष्ण अध्यायन 2) ब्राऊन बौने और अन्या तारकिय वस्तुएँ 3) पल्सर, मिलीसेकंड पल्सर और गोलाकार कलस्टार पल्सर 4) सॉफट गामा रे रिपीटर्स, 5) गमा रेबर्स्ट 6) ऑप्टीकल ट्रांजिस्टार उनहोंने इन खगोल विज्ञान क्षेत्रों मे महत्वापूर्ण योगदान दिया है|


कार्य :


        श्रीनिवास कुलकर्णी ने अपने करियर कि शुरुवात एक रेडियो खगोलशास्त्री के रुप मे कि थी | अपने सलाहकार कार्ल हेइल्सा के मार्गदर्शन मे अवशोषण का उपयोग करके मिल्कि वे गैलेक्सी कि अध्यायन किया था | और फिर इसकी चार भुजाओं का अवलेखन किया | कार्ल हेइल्सा के साथ लिखे गए समिक्षा लेखो कों इंटरस्टेलर माध्याम के क्षैत्र मे अत्याधिक उदधृत किया है |


        उन्होंने डोनाल्ट बैकर और सहयोगयिों के साथ PSRB119+21 नामक पहले मिली सेंकड पल्सर कि खोज कि थी और 1986 मे उन्होंने बाइनरी पल्सर का पहला ऑप्टिकल समकक्ष पाया था | जवकी वो एक मिलिकन फेलो थे | 1987 मे एक सूपर कंप्यूटर का उपयोग करते हुए गोलाकार क्लक्टर पल्सर कि खोज कि |


        NRAO मे उेल फ्राईल और ISAS मे तोशियो मुराकामी और उनकी सहयोगियो के साथ श्रीनिवास ने विखया कि नरम गामा रे रिपाटर्स सुपरनोवा अवशेष से जुडे न्यूट्रॉन तारे के वैशिष्टे है | 1997 मे कैलटेक NRAO टीम जिसका नेतृत्वा उनहोंने किया था | और गामा रे फटने अतिरिक्तगांगेल स्त्रोंतो से आए थे | और ऑप्टिकल समकक्षों की पहचान कि थी |


        कुलकर्णी के शोध ने गामा रे फटने क स्त्रोंतो के विस्तृत अध्यायन के साथ जैव पारदीज कि अणुवाई मे युरोपीय दल का नेतृत्वा किया था | कुलर्णी कैल्टेक होम के सदस्या भी थे | उनके काम मे हालिया मे पालोमर कैल्शियम से भरपूर सुपर और चमकदार लाल नोवा जैस ऑप्टिकल ट्रॉसजैंडर्स के नए की पहचान मे कामीयाब रहे है |


पूरस्कार और सम्मान :


1) 2012 मे भारतीय विज्ञान अकादमी पूरस्कार प्रदान किया |

2) 2001 मे FRS पूरस्कार |

3) 2003 मे युएस एनएएस पूरस्कार दिया गया था |

4) 2016 को रोयल नीदरलैंडस कला और विज्ञान अकादमी पूरस्कार |

5) 1991 मे हेलेन बी वार्नर पुरस्कार|

6) 1992 मे एनएसएफ वाटरमैन पूरस्कार |

7) 2002 मे जान्स्की पूरस्कार |

8) 2017 मे डैन डेविड पूरस्कार |