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अन्यवैज्ञानिकSCIENTIST

लक्ष्मणगुडी कृष्णमुर्ती डोराविस्वामी की जीवनी - Biography of Laxmanagudi Krishnamurti Doraviswami in hindi jivani

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नाम : लक्ष्मणगुडी कृष्णमुर्ती डोराविस्वामी 

जन्म : 13 मई 1927

ठिकाण : बेंगलुरु, भारत

पत्नी : राजलक्ष्मी

व्यावसाय : रासायनिक इंजीनियर, वैज्ञानिक, लेखक


प्रारंभिक जीवन :


        लक्ष्मणगुडी कृष्णमुर्ती डोराविस्वामी एक भारतीय रासायनिक इंजीनियर, लेखक और अकादमिक थे | डोरास्वामी का जन्म एक ब्राम्हण परिवार मे हुआ था | लक्ष्मणगुडी को तीन बहने थी | उनके पिता का नाम कृष्णमूर्ति और मॉ का नाम कमला है | सन 1927 को 13 मई को बेंगलुरु लक्ष्मणगुडी का जन्म हुआ था | सन 1952 मे लक्ष्मणगुडी विस्कॉन्सिन से भारत लौंटने के बाद उनका विवाह राजलक्ष्मी से हुआ था |


        लक्ष्मणगुडी डोराविस्वामी ने अपनी स्कुली शिक्षा मेथोडिस्ट बॉथन हाई स्कूल हैदराबाद मे की | फिर आग निजाम कॉलेज से रसायनशास्त्र बीएससी पास हुए उन्होने 1946 मे मद्रास विश्वाविदयालय से बीएससी की डिग्री हासिल कि, केमिकल इंजिनियरिंग के लिए उनके प्रदर्शन से उन्हे आंध्रप्रदेश सरकार व्दारा छात्रवृत्ति मिली |


        जिससे उनहे विस्कॉन्सिन विश्वाविदयालय मे रहने के दौरान उन्हे ओलाफ एंड्रियास होउगेनन से मिलने का अवसर मिला | उन्होंने 1950 मे अपनी मास्टार डिग्री पूरी की | 1952 मे केमिकल इंजीनियरिंग की पढाई शुरु की इसके लिए उन्हे हैदराबाद की निजाम सरकार से सहायता मिली | जो चाहते थे की सरकार की सेवा करणे के लिए डेरिस्वामी भारत लौंट आए |


        डोरिओस्वामी का डॉक्टेारल थीसिस अर्ध रासायनिनक शिखर पर था | जो की, अमेरिका के देखरेख मे कृषी विभाग के फॉरेस्टा प्रोडक्टस मे तैयार किया गया था | ब्रूकलिन के आर एल कार्लिसल केमिकल एंड मैन्यूकैक्टरिंग कंपनी मे डोराविस्वामी का करियर शुरु हुआ था | उन्होंने दो साल बाद राष्ट्रीय रसायन प्रयोगशाला पुणे मे एक वैज्ञानिक पद संभालने के कारण 1954 मे भारत छोड दिया | एनसीएल का उनका कार्यकाल एक सदी तक चला उनके कार्यकाल उन्होंने अनेक पदोंपर कार्य किया था जैसे की |


        सन 1961 सहयायक निदेशक उपनिदेशक 1966 तथा 1978 से निदेशक का पद संभाले हुए थे | बीच मे उन्हे कथित तौर पर वैधानिक और औधोगिक अनुसंधान परिषद के महानिदेशक के बाद सुवर्णसंधी दी गई जो की , भारत मे 38 राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं को नियंत्रित करने वाला सबसे बडा अनुसंधान ओर विकास संगठन है | पर उन्होंने यह पेशकश अस्वीकार कर दिया | उनको अनसन मारस्टान के प्रति ष्ठित पीटर रेली से मुलाकात के लिए भी अवसर मिला मर्फी विजिटींग प्रोफेसर ऑफ इंजीनियरिंग के लिए अपनी प्रोफेसर के रुप मे स्थायी इुए |


शैक्षणिक योगदान :


        सन 2001 मे डॉरीस्वामी ने ऑर्गिनिक सिंथेसिस इंजीनियरिंग प्रकाशित किया | इस पुस्तक मे कैटेलिसिस पर जोर दिया है | और इसके अलावा समग्र उत्पादकता बढाने मे प्रक्रिया कि भूमिका तेज हुई और कार्बनिक संश्लेषण मे कैटिलिसिस के अनुप्रयोगो की व्याख्या की गई थी | इसे केमिकल इंजीनियरिंग पर पहिला वयापक पाठ माना जाता है |


        एनसीएल के साथ साथ आयोबवा स्टैट युनिवर्सिटी मे , उन्होने अपने पोस्ट ग्रे्जयूएट और डॉक्टरेट अध्यायनों मे 45 शोध विव्दानों का उललेख किया | जब वह एनसीएल म कार्यरथ थे उस समय उन्होने कैटिालिसिस मे एक उत्कृष्टा केंद्र स्थापित किया था | डोराविस्वामी को रासायनिक प्रतिक्रीया इंजीनियरिंग मे कई नवचार शुरु करने के लिए भी जाना जाता है |


उपलब्धी :


        डोरीविस्वामी इंग्रजी भाषा कौशल मे पारंगत थे उनकी नौ पुस्तुके प्रकाशित हुई | उनमे से पाँच मुल रचनाएँ और चार संपादित पुस्तके थी | इन्होंने ऑरगॅनिक सिंथेसिस इंजीनियरिंग के अलावा और पुस्तके दी है जिनमे की विषम अभिक्रियाएँ विश्लेष्ण उदाहरण और साथ ही डिजाइन दी गई है | 1987 मे द एनालिसिस ऑफ केमली रिएक्टिंग सिस्टम स्टोयस्टिक एप्रोच प्रकाशित कीया था | 2011 मे भारत की राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला का बडा इतिहास प्रकाशित किया | सन 2014 मे पुरे बुनियादल बातों को अपने रासायनिक प्रतिक्रिया इंजिनियरिंग व्दारा प्रमाणित किया |


पुरस्कार और सम्मान :


1) सन 1983 मे एलके डोराविस्वामी को 1983 आयएनएसए सैयद हुसैन जहीर मेडल से पुरस्कारीत किया गया |

2) सन 1986 ओम प्रकाश भसीन पुरस्कार प्राप्ता हुआ|

3) सन 1987 जवाहरलाल नेहरु लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड मिला|

4) सन 1990 पघभुषण से पुरस्काररित किया गया |

5) सन 1988 सीई व्यक्तिगत उपलब्धि पुरस्कार मिला |

6) 1990 एआयसीई रिचर्ड एच विल्हेम पुरस्कार प्राप्ता हुआ|

7) सन 2001 IICHE पघ विभूषण प्रो | एमएमशर्मा मेडल से पुरस्कारित किया गया |

8) सन 2003 मे IICHEडॉ बी पी गोदरेज लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया |

9) 2004 ऐस विलीयम एच वाकर पुरस्कार प्रापता हुआ|

10) एल के डोराविस्वामी को होमी भाभा पदक भी मिला|