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नाम : श्रीनिनवासन वरदराजन
जन्म दि : 31 मार्च 1928
ठिकाण : तामिलनाडू, भारत
व्यावसाय : रसायनज्ञ कंपनी के कार्यकारी सिविल सेवक
प्रारंभिक जीवन :
श्रीनिवासन का जन्म 31 मार्च 1928 को हुवा है | उनका जन्म तामिलनाडू भारत मे हुवा है | उन्होंने अपना बीएससी पुरा किया | और 1948 मे मद्रास विश्वाविदयालय से बीएससी कि डिग्री प्राप्ता कि थी | एमएससी पूरी कि थी | और श्रीनिवासन ने 1949 मे आंध्र विश्वाविदयालय मे दुसरी पीएचडी डिग्री हासील कि थी | उन्होने दिल्ली विश्वाविदयालय मे दुसरी पीएचडी डिग्री हासिल कि थी | श्रीनिवास ने अपने करिअर की शुरुवात कि थी | उन्होने दिल्ली विश्वाविदयालय के रसायन विभाग मे अनुसंधान सहायक का काम किया 1949 से 1951 के दौरान उन्हे रॉयल कमीश्ंन के प्रवासी विव्दान के रुप मे चुना गया था |
श्रीनिवासन वरदराजन ने 1959 मे हिंदूस्तान लीवर के युके कार्यालय की अनुसंधान इकाई के प्रमूख रुप मे काम किया है | रुफ कंपनी लिमिटेड, कलकत्ता 1975:1980 और 1981:1983 के दौरान श्रिनिवासन तब विज्ञान और प्रौघोगिकी विभाग के सचिव बने थे | 1984 : 1986 की अवधि के दौरान सीएसआईआर नई दिल्ली मे श्रिनिवास ने प्रमूख के रुप मे काम किया है | उन्होंने परोह सिस्टाम बैंगलोर मे एक मुख्या वास्तुकार के रुप मे काम किया था |
उन्होंने हेवलेट फकर्ड मे मास्टार अर्किटैक्टा के रुप मे भी काम किया है | उनके अन्या हितों मे खगोल विज्ञान, आयुर्वेद और वैकल्पिक चिकित्सा शामिल है | वो एक सॉफटवेअर के इटेलिजेंट पावर मैनजमेंट सुट के अविष्कार है | आईआईटी बॉम्बे मे अपनी मास्टार डिग्री प्राप्ता करने के बाद, उन्होंने एक साल आयआयटीबी मे एक प्रोजेक्ट इंजीनियर के रुप मे बिताये है | जहाँ उन्होंने लोकप्रिय ओपन सोर्स प्रोडक्टस और IXP WATCH विकासित किए गए है |
कार्य :
श्रीनिवास वरदराजन एक भारतीय रसायनज्ञ है | जो सिविल सेवक, कॉपोरेट कार्यकारी और कई सार्वजनिक क्षेत्र के उपकृमो के पूर्व अध्याक्ष है | जैसे कि इंडियन पेट्रोकेमिकल्सा कॉपोरेशन लिमिटेड आयपीसीएल के अध्याक्ष है | और पंट्रोफिक्सा कोऑरेटिव लिमिटेड, इंजिनियर्स इंडिया लिमिटेड इआयएल के अध्याक्ष बने है | औरि ब्रिज एंड रुप कंपनी भारत पूर्व के अध्याक्षा है |
वरदराजन ने मद्रास विश्वाविदयालय और आंध्रविश्वाविदयालय मे दो मास्टार डिग्री एमऔर एमएससी प्राप्ता कि है | और दिल्ली विश्वाविदयालय और केंद्रीज विश्वाविदयालय दो डॉक्टरेट की उपाधि पीएचडी प्राप्ता कि है | और संकाय सदस्या के रुप मे काम किया है | दिल्ली विश्वाविदयालय मे 1949:53 मे काम किया है | द वर्ल्ड एकेडमी ऑफ साइंसेज के एक निर्वाचित साथी थे | भारत सरकार ने उन्हे समाज मे उनके योगदान के लिए 1985 मे पदम भूषण के तिसरे सर्वोच्चा नागरिक सम्मान से सम्मानित किया गया है |
उपलब्धी :
1) 1985 को पदमभुषण सम्मान से सम्मानित किया है |