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नाम : स्नेहासिक्ता स्वर्णकार
जन्म दि. : 1663
ठिकाण : पश्चिम बंगाल
पत्नी :
व्यावसाय : गर्दन के कैंसर पर अध्यायन
प्रारंभिक जीवन :
स्नेहासिक्ता स्वर्णकार का जन्म 1663 मे हुवा है | उनका जन्म भारतीय राजया पश्चिम बंगाल मे हुवा | उन्होंने 1993 मे जादवपूर विश्वाविदयालय से अपनी थसिस के लिए पीएचडी की उपाधि प्राप्ता कि | पिला ग्लोबोस की एल्बूमिन ग्रंथी से एक सियालिक एसिडबाइडिंग लेक्टिन पर अध्यायन किया है | वो काऊसिंल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च से जुनियर और सिनियर रिसर्च फेलोशिप पर और पोस्टा डॉक्टरेल काम के लिए स्नेहारिक्त अमेरिका चले गए |
और उन्होंने सन 1994:97 के दौरान कैलिफोर्निया विश्वाविदयालय डेविस और मरीन बायोलॉजिकल लेबोरेटरी मे पूरा किया उन्हेाने स्टोननी ब्रूक विश्वाविदयालय मे शोध वैज्ञानिक के रुप मे अपना करियर चालु किया | के रुप मे उनके दो कार्यकाल थे पहली बार 2002 मे स्क्रिप्स रिसर्च इंस्टीटयूट और फिर 2007 मे कनेक्टिकट विश्वाविदयालय मे कार्यकाल थे |स्वर्णकार कलकत्ता विश्वाविदयालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग मे विजिटिंग प्रोफेसर भी है | और वो कोलकता मे लेक रोड के किनारे रहते है |
कार्य :
स्वर्णकार का शेाध कैंसर जीव विज्ञान पर जुडा है | उसे विभिन्ना प्रकार के कैंसर जैसे कि फेकउे मस्तिष्क, मौखिक स्तन अगनाशय रक्त और गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर पर बुनियादी और अनुवाद संबंधी अनुसंधान करने के लिए जाना जाता है | उन्हेांने वैज्ञानिक के एक टिम का नेतृत्वा किया है | उन्हेांने हल्दी चिकित्सीय गुणों पर काय किया है |
और उन्हेांने पहचाना कि हल्दी के घटक करक्यूमिन कि नियंत्रित खुराक ने प्रकंद को अपना लिया रंग दे दिया जो कि गैस्ट्रिक सुजन और अल्सार के लिए चिकित्सीय एजेंट के रुप मे काम करते हे | स्वर्णकार ने दर्शाया कि एमएमपी9 एंजाइम को छोडते समय करक्यूमिन ने एमएमपी2 एंजाइम स्तार को बढा दिया और इस प्रकार दो इंजाइमों का संतुलन सुनिश्चित हुवा जो नए रक्त वाहिकाओं के निर्माण मे विपरित तरीकेां से कार्य करते थे |
स्वर्णकार ने नैनोकैप्साल्सा और एंटीऑक्सिडेंट के उपयोग के साथ गैस्ट्रिक अल्सार के लिए उपचार प्रोटोकॉल प्रस्ताव किया | रिसर्चगेट वैज्ञानिक लेखो के एक ऑनलाइन भंउार उनके से 103 को सूचीबध्दा किया है | उन्होंने संपादित पुस्ताकेां मे अध्यायों का योगदान दिया है | स्वर्णकार एएनबी मेमोरियल फाउंडेशन के शासी निकाय के सदस्या है | वो सेल सिग्नलिंग नेटवर्क पर उन्नत अध्यायन पर व्दितीय इंटरनेशनल मीट के आयोजन समिती के सचिव थे | स्वर्णकार पश्चिम बंगाल एकेडमी ऑफ साइंस एंड टेक्नेालॉजी का कोषाध्याक्ष है |
उपलब्धी :
स्वर्णकार को कैरियर विकास के लिए राष्ट्रीय जीवविज्ञान पूरस्कार : दिया गया है | जो की 2007 मे सर्वोच्चा भारतीय विज्ञान पुरस्कारों मे से एक था और 2013 मे पालों अल्टों दिर्धायू पूरस्कार : जीतने वाले अनिर्बान बंधोपाध्याय की टीम के सदस्या मे से एक थे |