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अन्यवैज्ञानिकSCIENTIST

श्रीधर रामचंद्र गद्रे की जीवनी - Biography of Shridhar Ramchandra Gadre in hindi jivani

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नाम : श्रीधर रामचंद्र गद्रे

जन्म दि: 20 मई 1950

ठिकाण : अकोला

पिता का नाम : रामचंद्र गद्रे

व्यावसाय : कम्प्युटेशनल व्काटम और सैध्दांतिक रसायन विज्ञान काम करते है |


प्रारंभिक जीवन :


        श्रीधर रामचंद्र गद्रे उनका जन्म 20 मई 1950 मे हुवा था | और उनका जन्म आकोला महाराष्ट्रा मे हुवा | उनहोंने आपनी स्त्रातक और मास्टार डिग्री पुणे विश्वाविदयालय मे प्राप्ता कि है | और भारतीय प्रौघोगिक संस्था कानपूर, मे स्थापित कि थी | भारत मे प्रोफेसर पीटी नरसिम्हन के साथ पीएचडी कम्पेलेट की | पीएचडी के बाद उन्होंने युनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलिन मे प्रोफेसर रॉबर्ड के साथ काम किया | श्रीधर गद्रे ने धनत्वा कार्यातमक सिध्दांत और क्वांटम रसायन विज्ञान मे कठोर असमानताओं पर शोध लगाया |


        पूणे विश्वाविदयालय के रसायन विज्ञान विभाग मे व्याख्याता के रुप मे काम किया | 1988 मे भौतिक रसायन विज्ञान के प्रोसेसर बने थे | उनकी स्थलाकृतिक विशैषताए था है कि 1985 मे उन्होंने नए अधिकतम एन्ट्रापी सिध्दांत का प्रस्ताव रखा था | जिसकी जांच अन्या शोधकर्ताओं व्दारा कि | आणविक लेक्ट्रोस्ट्रैटिक्सा और कमजोर अंत:क्रियाओ की जांच के ठेाकरे सबसे आगे रहे है |


        क्वांटम रसायनिक एवितो गणनाओं को कुशलता से समनांतर करने के लिए एल्गोरिदम और कोड मे भी गद्रे ने योगदान दिया है | आणविक ठेरलिंग दृष्टिकोण नामक एक तकनीक का बीडा उठाया को जोडकर बडे अणुओ को लिए संचिक और अलग अलग टुकडों पर गणना को जोडकर बडे अणुओ को लिए संचिक एक इलेक्ट्रॉन गुणो की गणना करना उनका योगदान था | सामान्या व्याक्तिगत कंम्पयूटर पर भी कुशल तरीके से बडे अणओ गणना करके के लिए हेसियन गणना करने के लिए बढाया गया |


कार्य :


        श्रीधर रामचंद्र गद्रे ने 1995 मे प्रोफेसर ने पुणे विश्वाविदयालय मे इंटरडिसिप्लिनरी स्कुल ऑफ साइंटिफिक कंम्प्यूटिंग की स्थापना की है | और उन्होंने उच्चा प्रभाव वाली पत्रीकाओं मे 220 मे अधिक लेखन और सहलेखन किया है | उन्होने 18 पीएचडी छात्रों और 46 मास्टारडिग्री छात्रों का कार्य किया है | प्रोसेसर गद्रे उन्होने कई पूस्ताक अध्यायों के लेखन किया है और सह लेखन भी किया है |


        भारत मे रसायन विज्ञान भौतिक और वैज्ञानिक कंम्प्यूटिंग मे कप्यूटेशनल प्रौघोगिकीयो के विकास के लिए जाना जाता है | भारतीय प्रौघोगिक संस्थान कानपूर 22 जुलाई 2010 मे वो भारत लौटे 2016 मे पूणे विश्वाविदयालय मे वैज्ञानिक कम्पयूटिंग के अंत:विषय स्कुल मे एक प्रतिष्ठित प्रोसेसर के रुप मे जाने जाते है 40 वर्ष से कम उम्र मे उन्होने विज्ञान मे उल्लेखनिय योगदान दिया है |


पूरस्कार और सम्मान :


1) 1992 मे भारतीय विज्ञान अकादमी पूरस्कार से सम्मानित किया गया |

2) 1996 मे भारतीय रार्ष्टीय विज्ञान अकादमी पूरस्कार |

3) 1993 मे प्रतिष्ठित स्थानिस्वरुप भटनागर पूरस्कार |

4) 1982 मे यंग साइंटीस्टा भारतीय विज्ञान अकादमी पदक और पुरस्कार से सम्मानित किया |

5) 1983 मे भारतीय विज्ञान अकादमी|

6) 1988:1991 मे आईएनएसए सिसर्च फेलो पूरस्कार |

7) 1990 मे ऑफ द इंडियन एकेडमी ऑफ साइंसेज पूरस्कार |

8) 1989 मे फेलो ऑफ महाराष्ट्र एकेडमी ऑफ साइंसेज पूरस्कार |

9) 1991 मे गद्रे और उनकी टीम को सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्डा कंप्म्यूटिंग अवार्ड दिया गया |