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वैज्ञानिक

श्याम स्वरुप अग्रवाल की जीवनी - Biography of Shyam Swaroop Agarawal in hindi jivani

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नाम : श्याम स्वरुप अग्रवाल

जन्म दि: 5 जुलाई 1941

ठिकाण : बरेली

पत्नी : प्रमिला दास 

व्यावसाय : जेनेटिक्सा और आणविक जीव विज्ञान


प्रारंभिक जीवन :


        श्याम स्वरुप अग्रवाल का जन्म 5 जुलाई 1941 मे हुवा था | उनके पिता का नाम अग्रवाल था और उनके पत्नी का नाम प्रमिला दास था | उनका जन्म भारत के उत्तर प्रदेश के एक औघोगिक शहर बेरली मे हुवा था | उनकी स्त्रातक की पढाई लखनऊ विश्वाविदयालय के कैनिग कॉलेज मे हुई थी |


        उनहोने 1905 मे एचआयएस मे कार्स पूरा किया था | इसके बाद उन्होंने किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की ऑनर्स डिग्री हासिल कि थी | और एक चिकित्सा पेशा अपना लिया | 1963 मे चांसलर गोल्ड मेडल और प्रथम रैंक हासिल करने के लिए हेविट गोल्ड मेडल जीतने वाली परिक्षा उत्तीर्ण की थी |


        आपनी एमडी के लिए KGMV मे पढाई जरी रखी | एक इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैसर फेलोशिप पर अपनी पोस्टा डॉक्टरेट की पढाई के लिए अमेरिका चले गए | महा फॉक्सा चेंस कैंसर सेंटर मे बारुक सैमुअल ब्लबर्ग की प्रयोगशाल मे काम किया |

भारत लौटने के बाद उन्होने अपने मल्टा मेटर कंजिएमयू एक व्याख्याता के रुप मे कार्य किया |


        रॉयल कॉलेज ऑफ फिजिशियन और कनाडा के सर्जन से FRPS डिग्री प्रापता किई | 1986 मे उन्होंने संजय गांधी स्त्रातकोत्तर आयुविज्ञान संस्थान व्दारा मेडिकल जेनेटिक्सा और क्लिनिकल इम्यूनॉलॉजी के लिए एक विभाग स्थापित करने के लिए अमंत्रित किया गया था |


कार्य :


        श्याम अग्रवाल और उनके सहयोगियों ने पनाक्सा जिनसेंग पर अध्यायन किया | और उनके काम से पौधे के इन्यूनोमॉडयूलेटरी गुणो की खोज कि थी | उन्होने एक लेख मे प्रकट किया था कि पैंटा जिनसेंग निकलने की इम्यूनोमाडयूलेटरी गतिविधी प्लाट मेडिका पत्रिका मे प्रकाशित किया | और उसी संबर मे मलेरिया के सेरोपिडोमियोलॉजी पर शोध लगाया |


        SGPGI:MS के क्लिनिकल इम्यूनोलॉजी विभाग के तत्वावधान मे उन्होंने काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च को कई परियोजनाओ को अंजाम दिया था | जिसमे दिसंबर 1984 मे भोपाल गैस त्रासदी के नजर आनुवंशिक प्रभावों का अध्यायन शामिला था | उन्होंने केंद्रीय ड्रग रिसर्च इंस्टीटयूट के लिए कार्य किया हैभारतीय विज्ञान अकादमी के ऑनलाईन लेख भंडार मे से IREPI को सुचिबध्दा किया गया |


        इसके अलावा उन्होंने प्रकाशित पुस्तकों मे भी योगदान दिया है | और उनके काम को लेखकों और शोधकर्ताओं ने उदृधत किया है | वे संस्थान मे क्लिनिकल इम्यूनोलॉजी विभाग की स्थापना की थी | और KGMU मे मेडिकल जेनिेटिक्सा युनिट स्थापित करने के प्रयासों का श्रेय भी दिया गया है |


पूरस्कार और सम्मान :


1) 1986 मे शांति स्वरुप भटनागर पूरस्कार मिला था |

2) 1986 मे आईसीएमआर कमला मेनन रिसर्च अवार्ड|

3) 1999 मे रैनबैंक्सी रिसर्च अवार्ड|

4) 2000 मे गोअप विज्ञान रत्ना पूरस्कार |