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नाम : नारायण बालकृष्णन नायर
जन्म : 6 जुलाई 1927
ठिकाण : केरल, भारत
पत्नि : गोमती
व्यावसाय : जीवविज्ञानी, परिस्थितीकिविज्ञानी
प्रारंभिक जीवनी :
नारायण बालकृष्णन नायर एक समुद्री जिवविज्ञानी परिस्थितीकिविज्ञानी और केरल कॉग्रेस के संस्थापक अध्याक्ष थे | उन्हें जलील जीवविज्ञान सेल्यूलोज का बायोडायटरेशन के लिए जाना जाता है | नायर का जन्म 6 जुलाई 1927 को भारत के केरल के एनीकुलम जिले के छोटे से गांव पेरुम्बावूर मे हुआ था | उनके बेटे का नाम बी चंद्रमोहन और बेटी का नाम अपर्णा कृष्ण मोहन था | और दोनों भी मेडीकल डॉक्टर थे | नायर परिवार तिरुवनंतपूरम के वझुयाकौड मे रहता था |
नारायण ने सन 1955 मे मद्रास विश्वाविदयालय से पीएचडी कि उपाधि प्रातप कि थी | 1965 मे उन्होंने डॉक्टर ऑफ साइंस की डिग्री हासिल करने के लिए वहाँ अपना शोध जारी रखा था | फीर वे संकाय के सदस्या के रुप मे केरल विश्वाविदयालय मे शामील हो गये थे | विश्वाविघ्यालय मे वे जलीय जिवविज्ञान और मस्त्यापालन विभाग मे प्रमूख के रुप मे कार्यरित थे | नायर ने राजयासरकार की विज्ञान प्रौघोगिकी और पर्यावरण समिती STEC के अध्याक्ष के रुप मे काम किया है | सरकारव्दारा स्थापित केरल राजया तटीय क्षे्त्र प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्या के रुप मे भी उन्हेांने कार्य किया है |
सन 2002 मे नायर ने काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च CSIR के एक समिरिटस प्रोफेसर के रुप मे कार्य किया है | नायर ने उष्णकटिबंधिय आर्द्रभुमि और मैगोव के संरक्षण उपाय प्रास्तावित किए थे | नायर केरल विज्ञान कांग्रेस के संस्थापक सदस्या रहे है | और वहाँ अध्याक्ष्ं के रुप मे कार्यरित रहे थे |
विज्ञान प्रौघोगिकी और पर्यावरण सिमती एसटीईसी के अध्याक्ष भी रहे है | 1991 मे उन्हेांने कलाडा पर्यावरण एक्शन प्रोगाम के लिए इंडो उच मिशन की अध्याक्षता कि थी | नायर 1978 से 80 के दौरान भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी कि परिषद और 1980 से 1986 तक जलीय जिवविज्ञान पकिा के मुख्या संपादक के रुप मे सेवावत थे और संपादकीय बोर्डो के सदस्या के रुप मे आठ विज्ञान पत्रिकाओं के साथ शामिल रहे थे |
उपलब्धि :
सम्मान/पूरस्कार :
1) 1971 मे नायर केा शांति स्वरुप भटनागर पूरस्कार से सम्मानित किया गया था |
2) 1979 मे उन्हें विश्वाविदयालय अनुदान आयोग व्दारा राष्ट्रीय प्रोफेसर के रुप मे चुना गया था |
3) 1980 को उन्हें ऑल इंडिया कांग्रेस ऑफ जूलॉजी गोल्ड मेडल मिला था |
4) 1982 मे उन्हें जवाहरलाल नेंहरु फैलोशिप के लिए चुना गया था |
5) 1984 को नायर को पघश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था |
6) 1987 मे उन्हें चंन्द्रकला होरा मेमोरियल पदक से सम्मनित किया गया था |
7) नानासेन एनवायरुमेटल रिसर्च सेंटर इंडिया ने उत्कृष्टता को पहचानने के लिए उनके सम्मन मे एक वार्षिक पूरस्कार प्रो.एन बालाकृष्णन नायर पुरस्कार कि स्थापना कि है |
पुस्तक/ग्रंथ :
1) नारायण लिखित पुस्ताक वुडबोरिंग टेरेडिनिड मोलस्क कि जीवविज्ञानी 1971 मे प्रकाशित् हुआ |
2) समुद्री परिस्थितीकि कि एक पाठयापूस्तक मैकनिक 1980 मे प्रकाशित हुई थी |
3) नारायण लिखित पूस्ताक जापीच जीवविज्ञान और मत्सापालन मे उन्न्ती 1987 को प्रकाशित हुई थी
4) नारायण लिखित पुस्ताक अंडमान नीकोबार व्दीप समूह और लक्षाव्दिप समूह के जीवों को नष्ट करनेवाली समुद्री लकडी 1994 मे प्रकाशित हुआ |
21 अप्रैल 2010 मे वायुथाकौड, केरल मे एन बालाकृष्णन नायर कि निधन हुई थी