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नाम : मैसूर डोरेस्वामी मधूसुदन
ठिकाण : मैसूर
व्यावसाय : वन्याजीव जिवविज्ञानी
प्रारंभिक जीवनी :
मैसूर डोरेस्वामी मधूसुदन एक भारतीय वन्याजीव जिवविज्ञानी और परिस्थितीकिविद है | मैसूर डोरेस्वामी मधूसुदन का जन्म भारत के मैसूर मे हुआ है | उन्होंने युवराज कॉलेज मैसूर से बुनियादि विज्ञान कि डिग्री प्रापता कि है | मधूसुदन ने वन्या जीव जिव विज्ञान संस्थान, देहशदून से वन्या जीव विज्ञान मे स्त्रातकोत्तर किया है |
उन्हेांने अनिनंध सिन्हा के मार्गदर्श्ंन मे अपनी पीएचडी पूरी कि है | उन्होंने पीएचडी थिसिस के लिए आसपास के वनों और उसके स्तनपायी संरक्षण पर इसके प्रभाव के उपर काम किया है | मैसूर डोरेस्वामी मधूसुदन को मानव वन्याजीव संघर्ष अरुणाचल मैकाक की खोज के लिए जाना जाता है |
कार्य :
मैसूर ने अपने कार्यव्दारे ब्राजील मे कॉफी उत्पादन और उसके मवेशियों के चरने और बांदीपूर के जंगलो के आसपास और सामित्वा के पैटर्न के बारे मे बताया | उन्होंने पया कि कॉफी की किम मे वेश्वीक गिरावट हुई थी | इसलिए निलगिरी और पश्चिमी घाटो मे कई क्षेत्रों मे कॉफी के एस्टेट मे खाद के रुप मे इस्तेमाल होने वाले गोबर की माँग बढ रही है | इसिलीए परिणामी गोबर बडे पैमाने पर गोबर का निर्यात हुआ था | जो इसे स्थानिय स्तार पर उत्पादित किया गया है |
कॉफी के बाागानों के लिए व्यावसायिक निर्यात के लिए एक उच्चा मूल्या वाले जैविक उर्वरक के लिए और ग्राम कृषि के लिए गोबर स्थानीय रुप से खपत खाद माना जाता है | गोबर के निर्यात के बाद इस क्षेत्र मे पशूधन कि संख्या मे वृध्दि हो गई थी | इसक काम ने प्रचलित धारणा को चुनौती दी और निर्वाह के संसाधन का उपयोग भारत मे संरक्षित क्षेत्र प्रबंधन के संदर्भ मे व्यावसायीक संसाधनों के उपयोग से अलग और बेहतर है | इसी तरह मदूसुदन ने हिमालय और उत्त्र पूर्व भारत मे कई राजया अन्या जंगलो मे भी काम किया है |
मधूसुदनन मैसूर के प्रकृति संरक्षण फाउडेशन के सहसंस्थापक है | वहाँ उन्होंने निदेशक के रुप मे भी काम किया है | मधूसुदन ने दक्षिण भारत मे नीलगिरी बायोस्कीलर रिसर्च मे मानव वन्याजीव संघर्ष के प्रभाओ को समझाने और उसे कम करने पर महत्वापूर्ण कार्य किया है |
उपलब्धि :
पुरस्कार/सम्मान :
1) मधुसूदन को व्हिटली पूरस्कार से सम्मानित किया गया है |
2) मई 2009 मे पश्चिमी घाट मे मानव वन्याजीव संघर्ष को कम करने के उनके काम की मान्यता मे ग्रीन ऑस्कर कहा गया |
3) मधुसूदन लीडस विश्वाविदयालय मे एक विजिटिंग रिसर्च के फैलो है |
4) मधूसुदन 2009 को एक टेड फेलो चुना गया था |