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वैज्ञानिक

एम. विजयन की जीवनी - Biography of M. Vijayan in hindi jivani

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नाम : एम. विजयन

जन्म : 16 अक्टूबर 1941

ठिकाण : चिरयू, केरल

व्यवसाय : संरचनात्माक जीवविज्ञानी


प्रारंभिक जीवन :


        एम विजयन का पूरा नाम मामनमना विजयन है | मामनमना विजयन एक भारतीय संरचनात्मक जीवविज्ञानी है | अनुसंधान का उनका मुख्या क्षेत्र प्रोटीन संरचनाएं है | उनका जन्म 16 अक्टूबर 1941 को केरल के चेरयू गॉव मे हुआ था | सन 1963 मे विजयन ने इलाहाबाद विश्वाविदयालय से मास्टर्स ऑफ साइंस की डिग्री प्राप्ता कि है |


        इसके बाद उन्होंने सन 1967 मे इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ साइंस से एक्स रे क्रिस्टलोग्राफी मे डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्ता की | सन 1968 से 1971 के दौरान विजयन ऑक्साफोर्ड विश्वाविघालय के प्रोफेसर डोरोथी हॉजकिन के अनुसंधान समुह मे डॉक्टरेट के बाद साथी रहे | उन्होंने इंसुलिन क्रिस्टल के लिए एक्स रे विवर्तन डेटा का अध्यायन भी किया है |


कार्य :


        विजयन ने माइक्रोबियल रोगनजनक के संरचनात्मक जीव विज्ञान पर एक राष्ट्रीय कार्यक्रम का आयोजन किया | उनके शोध का संबंध माश्क्रोबैक्टीरियल विशेष रुप से तपेदिक संबंधित प्रोटीन से है | उनके व्दारा यूरैसिल डीएनए ग्लाइकोसिलेन, सिंगल एम से हुए DNA बाइंडिंग प्रोटीन शरबोझाोमस रिसाइकिंलिंग फैक्टर, पोप्टिडाइल टीआरएनए हाइड्रॉलस, पैंटोथिनेट कीनास और डीएनए चरण प्रोटीन शामिल है |


        उन्होंने मायक्रोबैक्टीरिया मे इन प्रोटीनों की विशीष्ट संरचनात्माक विशेषताओं को स्पष्टा किया है | जो अन्या बांतो के अलावा, दवा विकास के अंतिम उद्रदेश्या के साथ संरचना अधारित अवरोधक डिजाइन के लिए रास्ते खोले गए |


        ऑक्साफोर्ड विश्वाविध्रालय मे अपना पोस्टडॉक्टरल शोध शुरु करने के बाद वह 1971 मे भारत लौट आए और भारतीय विज्ञान संस्थान IISc मे आणविक बायेाफिस्टा युनिट मे शामिल हुए | विजयन ने विभिन्ना क्षमताओ जैसे प्रोफेसर आणवीक बायेफिजिक्सा युनिट के अध्याक्ष दुसरों के बीच जैविक विज्ञान के प्रभाव के अध्याक्ष के रुप मे कार्य किया है |


        उन्होंने संस्थान मे DBT विशिष्टा जैव प्रौघोगिकीविद के रुप मे और बाद मे DAF होमी भाभा प्रोफेसर के रुप मे काम करना जारी रखा है | विजयन ने सन 2007 से 2010 मे भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान आकादमी के अध्याक्ष के रुप मे भी कार्य किया है |


पूरस्कार :


1) विजयन के मायक्रोबैक्टीरियल प्रोटीन और सूपरमॉलेक्यूलर एसोसिएश्ंन की संरचना और बातचीत के क्षेत्र मे अपना महत्वापूर्ण योगदान दीया है इसिलिए उन्हे भारत सरकारव्दारा 2004 मे पघश्री पूरस्कार से सम्मानित किया गया |

2) सन 1985 मे उन्हे विज्ञान और प्रौधोगिकी के लिए शांति स्वरुप भटनागर पूरस्कार मिला है |

3) DBT व्दाराप्रतिष्ठित बायोटिक्नोलॉजिस्टा पूरस्कार भी उन्हें मिला है | 

4) पहला सीएसआईआर/विज्ञान कॉग्रेस जीएन रामचंद्रन पूरस्कार भी उन्हे मीला है |

5) लक्ष्मीपत सीघांनियाविज्ञान और प्रौघोगिकि ने ता 2009 के लिए आईआईएम लखनऊ राष्ट्रीय नेतृत्वा पूरस्कार भी उन्हे दिया गया है|


पूस्तक :


        परस्पेक्टीवेस इन स्ट्रक्चरल बॉयोलॉजी अ व्हाल्यूम इन ऑनर ऑफ जी एन रामचंद्रा|