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अन्यवैज्ञानिकSCIENTIST

एम. एस. स्वामीनाथन की जीवनी - Biography of M. S. Swaminathan in hindi jivani

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नाम : एम. एस. स्वामीनाथन

जन्म : 07 अगस्त 1925

ठिकाण : कुंभकोणम, तामिलनाडू

पिता : एम के संबासीवम

व्यावसाय : आनुवांशिकीविद


प्रारंभीक जीवन :


        एम. एस. स्वामीनाथन का संपूर्ण नाम मैनकंबू सांबशिवन स्वामीनाथन है | स्वामीनाथन एक भारतीय अनुवांशिकीविद और प्रशासक थै | एम स स्वामीनाथन का जन्म 07 अगस्त 1925 को तामिलनाडू के कुंभकोणम शहर मे हुआ था | उनके पीता का नाम एम के संबासीवन और माता का नाम थगम्माल सांबाशिवन है | उनके पीता डॉ. एम के सांबाशिवन सर्जन थे |


        संबासिवन एक महात्मा गांधी के अनुयायी मे से एक थे उन्हेांने स्वदेशी आंदोलन के समर्थन मे अपने विदेशी कपडों को जलाने मे कुंभकोणम का नेतृत्वा करने का कार्य किया था | इसिलीए उन्होने चकित्सा क्षेत्र मे कृषिक्षेत्र का रुख किया एम एस स्वामिनाथन ने केरल के त्रिवेंद्रम युनीवर्सिटी कॉलेज तिरुवनंतपूरम मे महराजा कॉलेज मे अपनी स्त्रातक की डिग्री पूरी की | उन्होंने सन 1940 से 1944 तक वहां पढाई की और झुलॉजी मे बैचलल ऑफ सांइस की डिग्री प्राप्ता की |


कार्य :


        एम एस स्वामिनाथन ने किसानों को अधिक उत्पादन करने मे मदद करने के हेतू से ही अपने करीअर मे कृषि विज्ञान को भी शामिल किया था | उन्होंने तामिलनाडू एग्रीकल्चार सुनिवर्सिटी बैचलर ऑफ साइंस की डिग्री और वेलेडिक्टोरियन के रुप मे स्त्रातक किया | 1947 मे , भारतीय स्वातंत्रता वर्ष नई दिल्ली मे एम एस स्वामीनाथन भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान IARI मे चले गए और वहा वे अनुवांशिकी और पदप प्रजनन मे स्त्रातकोत्तार छात्र के रुप मे कार्यरित रहे | सन 1949 मे साइटोजेनिटीक्सा मे उच्चा अंतर के साा उन्होंने स्त्राकोत्तार की उपाधि भी प्राप्ता कि |


        एम एस स्वामीनाथन ने संघ लोकसेवा आयोग की परीक्षा लिखी और भारतीय पुलिस सेवा की अर्हता भी प्राप्ता की थी | सोलनम जंगली प्रजातियों की खैती आलु सोलनम टयूबरोसन से जीन को स्थानांतरीत करने के लिए प्रक्रियाओं को करने मे उनकी महत्वापूर्ण भूमिका रही | स्वामीनाथन ने सहयोगियो और छात्रों के साथ मिलकर बुनीयादी और व्यावहारिक रुप से पौधों की प्रजनन कृषि अनुसंधान और विकास और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण मे कई समस्याओं पर काम किया है |


        स्वामीनाथन विनला योजना पर कार्यवाई करने के लिए 1980 मे गठित संयुक्ता राष्ट्रा विज्ञान समिति के अध्याक्ष थे | उन्होने फाओ परिषद 1981 से 1985 के स्वातंत्र अध्याक्ष और प्रकृति और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय संध के अध्याक्ष सन 1984 से 90 मे के रुप मे भी काम किया है | इतना ही बल्की उन्हेांने सन 1989 से सन 1996 से वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर के भारतीय अध्याक्ष थे | 


उपलब्धि :


पूरस्कार / सम्मान :


1) एम एस स्वामिनाथन ने दुनियाभर के विश्वाविघालयों से 84 मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्ता की है | वर्तमान मे वे भारत के चेन्नाई मद्रास मे एम एस स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन मे इकेटिक मे युनेस्को की अध्याक्ष है | सन 2007 से 13 के दोरान भारत की संसद राजयासभा के सदस्या थे |

2) 2010 से 13 के दौरान उन्होंने खाघ सुरक्षा पर विश्वासमिति सीएफएस के लिए विशेषज्ञों के उच्चा स्तरीय पैनल एचएलपीई की अध्याक्षता की है |

3) सन 1991 मे पर्यावरणीय उपलब्धि के लिए टायलर पुरस्कार प्राप्ता हुआ|

4) सन 1989 को राष्ट्रापतिव्दारा उन्हे पघविभूषण पूरस्कार दिया गया |

5) सन 1961 मे उनहे शांतिस्वरुप भटनागर पूरस्कार प्राप्ता हुआ|

6) सन 1986 मे उन्हे अल्बर्ट आइंस्टीन विश्वाविज्ञान पूरस्कार मिला|

7) सन 2013 मे डॉ स्वामीनाथन को एनडीटीपी के लिए राष्ट्रीय एकता और महानतम ग्लोबल लिविग लीजेंड पूरस्कार के लिए इंदिरा गांधी पूरस्कार दीया गया |


पूस्तक :


1) डॉ. स्वामी नाथन एक विपूल वैज्ञानीक शोधकर्ता और लेखक भी है |

2) 1950 के बीच 46 एकल लेखक पत्र प्रकाशित किए है डॉ स्वामी नाथन के वैज्ञानिक कागज फसल सुधार 95 साइटोनेनेटिक्सा और जेनेटिक्सा 87 और फाइलोजेनेटीक्सा 72 के क्षेत्र मे है |

3) उनके सबसे लगातार प्रकाशित इंडियन जर्नल ऑफ जेनेटिकसा 46 करंट साइंस 36 नेचर 12 और रेडीएश्ंन बॉटनी 12 थे |

4) इसके आलावा स्वामीनाथन लिखित हॅन्डबुक ऑफ फुड एंड न्यूट्रीशिन भी प्रसिध्द है|