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चिंतामणि नागेश रामचंद्र राव की जीवनी - Biography of Chintamani Nagesh Ramchandra Rao in hindi jivani

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नाम : चिंतामणि नागेश रामचंद्र राव

जन्म तिथी : 30 जून 1934

ठिकाण : बेंगलोर, किंगडम ऑफ मैसूर

व्यावसाय : रसायनतज्ञ


प्रारंभिक जीवनी :


        सी. एन. आर. राव का जन्म 30 जून 1934 को बैंगलोर मे हनुमंत नागेश राव और नगम्मा नागेश राव के घर मे हुआ था | वह एक अकेला बच्चा था | उनके माता पिता ने एक शैक्षणिक महौल बनाया था | वह कम उम्र मे ही अपनी मॉ ओर पिता से अंग्रेजी मे अच्छी तरह से वाकिफ थे | वह प्राथमीक विदयालय मे उपस्थित नही थे, लेकिन अपनी मॉ व्दारा घर टयूट किए गए थे |


        जो विशेष रुप से गणित और हिंदू साहित्या मे कुशल थे | उन्हेांने 1940 मे छह साल कि उम्र मे मिडिल स्कूल मे प्रवेश लिया था हालॉकि वह अपनी कक्षा मे सबसे छोटा था | उन्हेांने 1944 मे प्रथम श्रेणी मे निम्न माध्यामि परिक्षा कक्षा VII पास कि थी |वह दस साल के थे, तब उनके पिता ने उन्हे चार साल पच्चीस पैसे के साथ पुरस्कृत किया था |


        उन्होंने बसवणगुडी मे आचार्य पातशाल हाई स्कूल मे पढाई कि थी जिसने रसायन विज्ञान मे उनकी रुचि पर एक स्थायी प्रभाव डाला था | उनके पिता ने उनहे अपनी मातृभाषा को प्रोत्साहित करने के लिए कन्नड:पाठयाक्रम मे दाखिला लिया था, लेकिन घर पर सभी बातचीत के लिए अंग्रजी का इस्तेमाल किया था | उन्हेांने 1947 मे प्रथम श्रेणी मे माध्यामिक स्कूल छोडने का प्रमाणपत्र पूरा किया था|


        उन्हेांने 1951 मे मैसूर विश्वाविदयालय से प्रथम श्रेणी मे स्त्रातक कि उपाधि प्राप्ता कि थी | उन्हेांने शुरु मे केमिकल इंजिनियरिंग मे डिप्लोमा या स्त्रातकोत्तर डिग्री के लिए भारतीय विज्ञान संस्थान IISC मे शामिल होने के बारे मे सेाचा था | लेकिन एक शिक्षक ने उन्हें बनारस हिंदू विश्वाविदयालय मे भाग लेने के लिए राजी कर लिया था |


        उन्होंने दो साल बाद बीएचयू से रसायन शास्त्र मे स्त्रातकोंत्तर किया था | 1953 मे उनहें IIT खडगपूर मे पीएचडी के लिए छात्रवृत्ती प्रदान कि गई थी | लेकिन चार विदेशी विश्वाविदयालयों एमआईटी पेन स्टेट, कोलंबिया और पडर्यू ने भी उन्हें वित्तीय सहायता कि पेशकश कि थी | उनका पहला शोध पत्र 1954 मे आगरा विश्वाविदयालय के जर्नल ऑफ रिसर्च मे प्रकाशित हुआ था | 


        राव कि शादी 1960 मे इंदूमती राव से हुई | उनके दो बच्चे है संजय और सुचित्रा, उनके बेटे संजय राव बैंगलोर के स्कूलों मे विज्ञान को लोकप्रिय बनाने मे लगे हुए है | उनकी बेटी सुचित्रा का विवाह महाराष्ट्र के पूणे मे भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान IISER के निदेशक कोरम गणेश से हुआ है | राव टेक्नोफोबिक है और वह कभी भी अपने ईमेल कि जांच स्वयं नही करते है | उसने यह भी कहा कि वह अपनी पत्नी से बात करने के लिए मोबाइल फोन का ही इस्तेमाल करता है |


कार्य :


        चिंतामणि नागेश रामचंद्र राव जिसे सी. एन. आर. राव के रुप मे भी जाना जाता है | वह एक भारतीय रसायनतज्ञ है | जिन्हेांने मुख्या रुप से ठोस राजया और संरचनात्माक रसायन शास्त्र मे काम किया है | राव दुनिया के सबसे ठोस राजया और साम्रगी रसायनतज्ञों मे से एक है | उन्होंने पांच दशकों मे क्षैत्र के विकास मे योगदान दिया है | धातु के आक्साइड के संक्रमण पर उनके काम ने उपन्यास कि घटनाओं और भौतिक गुणों और इन सामग्रीयों के संरचनात्मक रसायन विज्ञान के बीच बुनियादी समझ पैदा कि है | 


        राव ने दो आयामी ऑक्साइड साम्रग्री जैसे क‍ि CUSO4 का संश्लेषण करने वाले सबसे पहले मे से थे | इस तरह के अध्यायनों के आवेदन क्षेत्रों मे गहरा प्रभाव डाला है | उन्होंने हाइब्रिड साम्रग्रीयों पर अपने काम के आलावा, पिछले दो दशकों मे नैनोमैटेरियल्सा मे काफी योगदान दिया है | अपनी स्त्रातक की पढाई पुरी करने के बाद राव 1959 मे आईआई एससी मे शामिल होने और एक स्वातंत्र शेाध कार्यक्रम को अपनाने के लिए बैंगलोर लौट आए थे |


        1963 से 1976 तक राव ने भारतीय प्रौघोगिकि संस्थान कानपूर मे रसायन विज्ञान विभाग मे एक स्थायी पद स्वीकार कियाथा | उसी दौरान उन्हे 1964 मे भारतीय विज्ञान अकादमी के एक साथी के रुप मे चुना गया था | 1994 के बीच आईआई एससी के निदेशक बने थे | वह कैलिफोनिया विश्वाविदयालय, सांता बारबरा मे एक विजिटीग प्रोफेसर के रुप मे नियुक्तियाँ ली थी | वह 1983:84 के दौरान किंग्स कॉलेज कैब्रिज मे कैम्ब्रिज विश्वाविदयालय मे प्रोफेसर थे |


        राव वर्तमान मे नेशनल रिसर्च प्रोफेसर थै | जवाहरलाल नेहरु सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च बैंगलोर के मानद अध्याक्ष है | जिसकि स्थापना उन्होंने 1989 मे कि थी | उन्हें जनवरी मे भारतीय प्रधानमंत्री के लिए वैज्ञानिक सलाहकार परिषद का अध्याक्ष नियुक्त किया गया था | वह इंटरनेशनल सेंटर फॉर मेटेयिल्सा साइंस आयसीएमसी के निदेशक भी है | और विज्ञान पहल समूह के बोर्ड मे कार्य करते है |


पूरस्कार और सम्मान :


1) 1974 मे पदमश्री से सम्मानित|

2) 1985 मे पदम विभूषण से सम्मानित|

3) 2001 मे कर्नाटक राजया सरकार व्दारा कर्नाटक रत्न|

4) 2014 मे भारत रत्न से सम्मानित|

5) 2002 मे ब्राजील के राष्ट्रपति से ग्रेट ऑर्डर ऑफ साइंटिफिक मेरिट|

6) 2005 मे शेवे लियर डी ला लेगियन डी होनूर|

7) 2009 मे जापान के राइजिंग सन गोल्ड एंड सिल्बर स्टार का आदेश|

8) 1967 मे इंस्लैड कि फैराडे व्दारा मार्लो मेडल|

9) 1968 मे रसायन विज्ञान मे विज्ञान और प्रौघोगिकी के लिए शांति स्वरुप भटनागर पूरस्कार से सम्मानित|

10) 1973 मे येदानपल्ली पदक और पूरस्कार|

11) 1975 मे विश्वाविदयालय अनुदान आयोग व्दारा भौतिक विज्ञान मे सी वी रमन पूरस्कार से सम्मानित|

12) 1980 मे भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी व्दारा एसएनबोस मेडल|

13) इंडियन एसेासिएशन ऑफ नैनोसाइंस एंड नैनो टेक्नोलॉजी अगस्ता 2018 से प्लैटिनम मेडल|

14) 2009 मे रॉयल सोसाइटी व्दारा रॉयल मेडल|