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नाम : सी. ओ. करुणाकरण
जन्म तिथी : 1982
ठिकाण : मवेलिक्कारा
व्यावसाय : जीवाणू विज्ञानी
मृत्यू : 30 नवंबर 1970
पत्नी : परकुट्टी
प्रारंभिक जीवनी :
सी. ओ. करुणाकरण का जन्म 1982 को नवेलिक्कारा मे हुआ था | उन्होंने उनकी प्रारंभिक स्कूली शिक्षा मवेलिक्कारा गवर्नमेंट हाई स्कूल मे कि थी | महाराजा कॉलेज मे इंटरमीडीएट के बाद उन्होंने बैंचलर ऑफ मेडिसिन और बैचलर ऑफ सर्जरी के लिए मद्रास मेडिकल कॉलेज मे प्रवेश लिया था | मद्रास मेडिकल कॉलेज मे अपने अध्यायन के बाद उन्होंने DYMH, DPH DB को कैम्ब्रिज विश्वाविदयालय और लंदन विश्वाविदयालय से पूरा किया था|
वह अलुमूटील पाडेतथिल उममिनि कुंजू चन्नार और कुंजूपेनू चन्नती के पूत्र है | उनके बडे भाई सी ओ महाधवन तिरुवनंतपूरम शहर के मूख्या सचिव और मेयर थे | उनके छोटे भाई डॉ. सी. ओ. दामोदरन केरल लोकसेवा आयोग के आयुक्ता थे |
कार्य :
डॉ. सी. ओ. करुणाकरणन एक उल्लेखनीय जीवाणूविज्ञानी और सुक्ष्म जीवविज्ञानी तिरुवनंतपूरम के सरकारी मेडिकल कॉलेज के संस्थापक थै | वह कॉलेज के पहले प्रिंसिपल थे | और श्रवण कोर कोचीन राजया मे पहले मेडिकल विश्वाविदयालय कि स्थापना के लिए नियुक्त विशैष् अधिकारी भी थे | उन्हेांने एक एस्टैट के चिकित्सा अधिकारी के रुप मे काम किया था | और फिर तिरुवनंतपूरम के स्वास्था अधिकारी के रुप मे एक छोटी अवधि के लिए काम किया था |
बाद मे, उन्होंने तिरवनंतपूरम मे सिविल अस्पाताल वर्तमान त्रिवेंद्रम जनरल अस्पताल के पास सार्वजनिक स्वास्था प्रयोगशला के अधिक्षक के रुप मे पदभार संभाला था | सर सी पी रामास्वामी अयर ने उनकी क्षमताओं को महसूस करते हुए उन्हें औघोगिक प्रशिक्षण के लिए संयुक्त राजया अमेरिका भेजा था | जब उन्होंने प्रयोगशलाा मे सुधार किया और 1948 मे त्रिवेंद्रम मे त्रावरणकोर कोचीन राजया मे पहला मेडिकल कॉलेज स्थापति करने के लिए विशेष अधिकारी के रुप मे नियुक्त किया गया था |
उन्हें तिरुवनंतपूरम के सरकारी मेडिकल कॉलेज के पहले प्रिंसीपल और माइक्रोबायोलॉजी के प्रोफेसर के रुप मे नियुक्त किया गया था | कॉलेज के छात्रों के लिए अधिकतम अंतर्राषट्रीय प्रदर्शन प्राप्ता करने के उनके सपने को साकार करते हुए, विश्वास्वास्था संगठन के स्वीडन के तत्कालीन डीएचएस डॉ एक्साला जे होजर को एक विशेषज्ञ के रुप मे भेजा था |
डॉ. सी ओ करुणाकरण ने तब प्रिंसिपल के रुप मे पद छोड दिया था | और डॉ होजेर को प्रिंसिपलशिप दि और उनके अधीन वाइस प्रिंसिपल के रुप मे काम करते रहे | डॉ अलेक्जेंडर फलेमिंग साहितकई अंतराराष्ट्रीय विशेषज्ञों केा कॉलेज लाने मे भी उनका महत्वापूर्ण योगदान रहा है | उन्हेांने केरल विश्वाविदयालय के सीनेट और सिंडीकेट के सदस्या और डीन के रुप मे भी काम किया है | वे 1958 से 1959 तक त्रावणकोर मेडिकल काउंसिल के अध्याक्ष और भारतीय चिकीत्सा संघ के अध्याक्ष रहे है |
वह राजया परिवार नियोजन बोर्ड और परिवार नियोजन संचार अनुसंधान के मुख्या सलाहकार थे | 30 नवंबर 1970 को उनका निधन हो गया | उन्होंने कहा था कि उनके अंतिम संस्कार मे कोई राजकिय सम्मान या धार्मिक अनुष्ठान नही किया जाएगा | यह भी कहा था कि शरीर को छह घंटे से अधिक नही रखा जाना चाहिए |
पुरस्कार और सम्मान :
1) उन्हें देश के लिए अनेक योगदान को देखते हुए श्री चित्र तिरनल व्दारा राजयोसवा सम्मान से सम्मानित किया गया था |