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अन्यवैज्ञानिकSCIENTIST

छीतर मल गुप्ता की जीवनी - Biography of Chhitar Mal Gupta in hindi jivani

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नाम : छीतर मल गुप्ता

जन्म तिथी : 1 सितंबर 1944

ठिकाण : राजस्थान, भारत

व्यावसाय : आणविक जीवविज्ञानी


प्रारंभिक जीवनी :


        छीतर मल गुप्ता का जन्म 1 सितंबर 1944 को राजस्थान मे हुआ था | छीतर गुप्ता ने राजस्थान विश्वाविदयालय जयपूर राजस्थान से बीएससी और एमएससी कि डिग्री हासिल कि थी | जिसके बाद उन्होंने डॉ नित्या नंद कि देखरेख मे औषधीय रसायन विज्ञान के क्षैत्र मे काम करने के लिए केंद्रीय औषधी अनुसंधान संस्थान सीडीआर आई लखनऊ मे दाखिला लिया था | आगरा विश्वाविदयालय आगरा से पीएचडी कि डिग्री हासिल कि थी |


कार्य :


        छीतर गुप्ता एक भारतीय आणविक जीवविज्ञानी और अकादमिक है | जिनमें जैविक झिल्लियों मे ट्रांसबाइलर फॉस्फोलिपिड विषमता पर शोध के लिए जाना जाता है | उन्होंने परजीवी रोगों मे दवा लक्ष्मीकरण और लीशमैनिया एक्टिन और एक्टिन बाइंडिग प्रोटीन के संरचना और कार्य के लक्षण का वंर्णन किया है | वह सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीटयूट लखनऊ के पूर्व निदेशक है | और चंदीगड स्थित इंस्टीटयूट ऑफ मइक्रोबियल टेक्नोलॉजी के निदेशक है | भारत सरकार के जैवप्रौघोगिकी विभाग के एक प्रतिष्ठित बायोटेक्नोलॉजी फेलो और प्रतिष्ठित बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च प्रोफेसर है |


        अपनी सेवानिवृत्ति के बाद, उन्होंने सीडी आरआई मे पहले विशिष्टा जैव प्रौघोगिकिविदू के रुप मे काम करना जारी रखा था | और फिर 70 वर्षे कि आयू तक प्रतिष्ठित जैव प्रौघोगिक अनुसंधान प्रेाफेसर के रुप मे काम किया था | उसके बाद उन्होंने कर्नाटक के बेंगलुरु मे जैव सूचना विज्ञान और अनुप्रयूक्त जैव प्रौघोगिकी संस्थान मे प्रवेश लिया था | जहाँ वे अभी भी है | विशिट प्रेाफेसर माननीय और इन्फोटिस चेयर के रुप मे काम करना था | विशैषज्ञता के उनके क्षैत्र झिल्ली जैव रसायन ओर औषधीय रसायन विज्ञान है |


        उन्हेांने परजिवी रोंगो और झिल्ली फॉस्फोलिपिडस ट्रांसबाइलर डायनेमिक्सा मे दवा लक्ष्यीकरण के क्षेत्रों मे बडे पैमाने पर योगदान दिया है | और लीशमैनिया मे एक्टिन साइटोस्केलेटल नेटवर्क के क्षरण्ं पर काम कर रहे है | इन अध्यायनों के परिणाम स्वरुप लगभग 136 मूल शेाध पत्र, 10 समीक्षा लेख, 5 पूस्ताक अध्याय और 6 पेंटेट प्रकाशित हुए है |


        इसके आलावा वह सीडीआरआई के लिए सीतापूर रोड पर नए परिसर के निर्माण योजना और डिजाइन के लिए भी जिम्मेदार है | उनहोने कई सम्मान और पूरस्कार : प्राप्ता किए है | और कई महत्वापूर्ण राष्ट्रीय और आंतराष्ट्रीय समितीयों के सदस्या के रुप मे काम किया है | सीडीआरआई के वैज्ञानिकों के साथ एक अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका मे प्रकाशित एक नैदानिक अलगाव के लिए धेाखा घडी कि बोली लगाने का प्रयास करने का अशेष लगाया गयाहे |


पूरस्कार और सम्मान :


1) भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी ने 1974 मे गुप्ता को युवा वैज्ञानिक पदक से सम्मानित किया था |

2) उन्हें 1995 मे शांति स्वरुप भटनागर पूरस्कार मिला था |

3) 1974 मे उन्हें रैनबैक्सी रिसर्च फाउंडेशन पूरस्कार मिला था |

4) 1994:95 उन्हे फिक्की पूरस्कार मिला था |

5) ओमप्रकाश भसीन पूरसकार 1999

6) गोयन पूरसकार 2000

7) भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी का स्वर्ण जयंती समारोह पदक 2001 भी मिला है |

8) इंडियन एकेडमी ऑफ साइंसेज ने उन्हे 1987 मे एक साथी के रुप मे चुना ाा |

9) भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी ने 1989 मे सूट का पालन मिया था |

10) नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज भारत ने उनहे अपने साथी के रुप मे चुना था |

11) उसी वर्ष द वर्ल्ड एकेडमी ऑफ साइंसेज ने भी उन्हे एक साथी के रुप मे चुना था |