Deoxa Indonesian Channels

lisensi

Advertisement

" />
, 06:11 WIB
अन्यवैज्ञानिकSCIENTIST

चिट्टेनिपट्टू पुलेवेटिल राजेंद्रन की जीवनी - Biography of Pettipattu Pulavettil Rajendran in hindi jivani

Advertisement


नाम : चिट्टेनिपट्टू पुलेवेटिल राजेंद्रन

जन्म तिथी : 29 मई 1955 आयू 64

ठिकाण : ओट्रटापलम, पलक्कड, केरल

व्यावसाय : भूविज्ञानी

पत्नी : कुसल राजेंद्रन


प्रांरभिक जीवनी :


        सी. पी. राजेंद्रन का जन्म 29 मई 1955 को केरल राज मे ओट्रटापलम गांव मे हुआ था | राजेंद्रन ने अपनी स्कूली शिक्षा तिरुवनंतपूरम त्रिवेंद्रम मे पूरी कि थी | और बीएससी 1976 यूनिवर्सिटी कॉलेज, केरल विश्वाविदयालय से पूरी कि थी | और एमएससी 1978 से कोचीन विश्वविदयालय से डिग्री हासिल कि थी | और एमएससी 1978 से कोचीन विश्वाविदयालय से डिग्री हासिल कि थी |


        वह एक शोध विज्ञानिक के रुप मे सेंटर फॉर अर्थसाइंस स्टडीज मे शामिल हो गए थे | 1988 मे कोचीन विज्ञान और पौघोगिकी विश्वाविदयालय से पीएचडी प्राप्ता करने के बाद वह 1993 तक पोस्टडॉक्टरल अध्यायन के लिए दक्षिण कैरोलिना विश्वाविदयालय यूएसए चले गए थै | उन्हेांने प्रो कुसला राजेंद्रन से शादी कि जो वर्तमान मे भारतीय विज्ञान संस्थान बेंगलोर मे सकाय मे है |


कार्य :


        सी. पी. राजेंद्रन एक भारतीय भूविज्ञानी है | जिन्होंने मुख्या रुप से जीवाश्मिकि और भारतीय भूविज्ञान मे काम किया है | 1994 मे पृथ्वी विज्ञान अध्यायन केंद्र मे कार्य किया है |जहां वे 2008 तक जारी रहे थे | उन्हेांने 2009 मे भारतीय विज्ञान संस्थान मे भारत सरकार व्दारा रानानुजन फैलोशिप स्वीकार कि थी | और अब पृथ्वी पर शुरु किए गए केंद्र मे काम करते है | 


        डॅा. राजेंद्रन जीवाश्म विज्ञान मे भारत के अग्रणी विशेषज्ञ भूकंप भूविज्ञान, जीवाश्म विज्ञान और सूनामी भूविज्ञान मे अपने अनुसंधान योगदान के व्दारा इस क्षेत्र के विकास मे योगदान दिया है | उनके प्रयासों ने भारत के विभिन्ना भूकंपीय प्रातों मे भूकंप कि पूनरावृत्ती और दोष क्षेत्र विरुपण मे अंतर्दुष्टी प्रदान कि है | उन्हेांने किलारी लातूर केरल कच्छ केरण सौराष्ट्र कैम्बे पनवेल महाराष्ट्र असाम, मध्याहिमालय साहित देश के विभिन्ना भागों मे जीवाश्म विज्ञान कार्यो कि शुरुआत कि थी |


        कच्छ भूकंप के 1819 रण के महाकाव्या क्षेत्र मे उनकी खोज से 800 और 1000 साल बी पी बीच एक और घटना कि पहचान हुई थी | जो 2001 और पूराने सैंडब्लो के सापेक्ष आकार और आवृत्ती के आधार पर था | उन्होंने कहा कि पहले कि व्याख्या भुकंप कि उत्पत्ति भी उसी स्त्रोत से हुई होगी |


        सी. पी. को आउटलुक पत्रिका व्दारा देश के शीर्ष दस युवा शोधकर्ताओ मे स्थान दिया गया था | वह भारत मे भूकंप के अध्यायन और भूकंपीय खतरे के लिए मूल वैज्ञानिक योगदान देने मे सक्षम है | हाल के वर्षो मे वह सुनामी भूविज्ञान और खतरे पर भी काम कर रहे है | और ईरान मे चिली तट और मकरान तट जैसे कई महत्वापूर्ण स्थानों पर काम किया है | वह कई देशों के विभिन्ना शोधकर्ताओं के बीच, सुनामी के खतरों पर सहयोगा कार्य और सहयोग मे भी शामिल है | वह विज्ञान कि लोकप्रियता के लिए लेख भी लिखते हे | 


पूरस्कार और सम्मान :


1) अपदा प्रबंधन के क्षैत्र मे उनके योगदान के लिए उन्हें भारत सरकार व्दारा 2009 मे राष्ट्रीय भू विज्ञान पूरस्कार से सम्मानित किया गया था |

2) सदस्या, अनुसंधान सलहाकार समिती 2004:06|

3) भारतीय भूवैज्ञानिक समिती के सदस्या 2004:07|

4) सदस्या राष्ट्रीय भूकंपवाद कार्यकम पर परियोजना सलाहकार और प्रबंधन समिती 1978:2002|

5) सदस्या, केरल राजय विज्ञान और प्रौघोगिकि 2005 के लिए प्राकृतिक अपदा प्रबंधन योजना|

6) सदस्या, विशेषज्ञ समिती केरल सरकार हाल के भूकंपो के आलोक मे मुल्लापेरियार बांध कि स्थिरता 2000:01|