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नाम : चंन्द्रकांत राजू
जन्म तिथी : 7 मार्च 1954
ठिकाण : ग्वालियर मध्यप्रदेश
व्यावसाय : कम्प्यूटर विज्ञानी
प्रारंभिक जीवनी :
चन्द्रकान्त राजू का जन्म 7 मार्च 1954 को मध्याप्रदेश के ग्वालियर मे हुआ था | उन्होंने सन 1973 मे मुंबई के विज्ञान संस्थान से विज्ञान मे स्त्रातक कि उपाधि प्राप्ता कि थी | उन्होंने मुंबई के ही प्रगत गणित अध्यायन केंद्र से सन 1975 मे एमएससी किया था | उन्होंने 1980 मे कोलकता स्थित भारतीय सांख्यिकि संस्थान से पीएचडी कि थी |
कार्य :
चंद्रकांत राजू एक कंम्प्यूटर वैज्ञानिक, गणितज्ञ, शिक्षक भौतिक विज्ञानी और पॉलीमैथ शोधकर्ता है | 1980 के दशक कि शुरुआत मे, वे पूणे विश्वाविदयालय के सांख्यिकि विभाग मे एक संकाय सदस्या थे | राजू का पहला भारतीय सूपर कंम्प्यूटर परम 1988:91 मे महत्वापूर्ण योगदान था | राजूने काफी ऐतिहासिक शोध भी किया है | सबसे उल्लेखनीय रुप से दावा किया है कि भारत से युरोप मे अनंत काल क गणना कि गई थी |
राजूने ईटी व्हिटकर के विश्वासों पर बनाया कि अल्बर्ट आइंस्टीन के हेनरी पोनकेरे के सिध्दांत है | राजू का दावा है कि वे उल्लेखनीय रुप से समान थे | और विशेष सापेक्षता के हर पहलू को 1989 और 1905 के बीच पत्रों मे प्रकाशित किया गया था | राजू ने कहा कि आइंस्टीन कि विफलता के लिए कार्यात्मक अंतर कि आवश्यकता को पहचानना एक गलती है |
जो बाद के सापेक्षतावाद को रेखांकित करता है | उनका प्रस्ताव है कि सापेक्ष विभेदक भौतिकी को कार्यात्माक अंतर समीकरणों का उपयोग करके सुधार किया जाना चाहिए |
अपने शोध के माध्याम से, राजू ने दावा किया है कि विज्ञान के पश्चिमी दर्शन, जिसमे इसके पहलुओ को शामिल किया गया है | और गणितीय प्रमाण कि प्रकृति रोमन कैथोलिक चर्च की सार्वजनिक आवश्याकताओं मे निहित है | उन्होंने मूख्या रुप से भौतिकी, गणित और विज्ञान के इतिहास और दर्शन के विषयों पर 12 किताबें और दर्जनों लेख लिखे है |
पुस्तके :
1) समय एक सुसंगत सध्दिांत कि और 1994|
2) समय कि ग्यारह तस्वीरें 2003|
3) गणित कि संस्कृति नींव 2007|
4) क्या विज्ञान कि उत्पात्ति पश्चिमी है|