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नाम : बिस्वेश्वर भट्टाचार्यी
जन्म तिथी : 1942
ठिकाण : पश्चिम बंगाल
व्यावसाय : रासायनिक इंजिनियर
प्रारंभिक जीवनी :
बिस्वेश्वर भट्टाचार्यी का जन्म 1942 मे भारतीय राजया के पश्चिम बंगाल मे हुआ था | और उन्होंने वहाँ के केमिकल इंजिनियरींग मे मास्टार डिग्री हासिल करने के लिए यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ टैक्नोलॉजी कोलकता मे दाखिला लिया था | बाद मे उन्होंने 1996 मे पास होने के लिए DARC ट्रेनिंग स्कूल जवाइन किया था |
उन्होंने बिहार के जादुगूडा मे यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया मे काम किया था | जो देश कि एकमात्र युरेनियकम मिल थी और रतनन मटेरियल की श्रेणी मे रेयर मैटेरियल्सा प्लॉट कि स्थापना मे महत्वापूर्ण भूमिका निभाई थी |
कार्य :
बिस्वेश्वर भट्टाचार्यी एक भारतीय रसायनिक इंजिशि बहु अनुशासनात्क वैज्ञानिक और भाभा परमाणू अनुसंधान केंद्र BARC के रासायनिक अभियांत्रिकि और प्रौघोगिकी समुह के पूर्व निदेशक है | वह दुर्लभ साम्रग्री परियोजना मैसूर के पूर्व परियोजना निदेशक और भारत के परमाणू ऊर्जा आयोग के सदस्या है |
मद्रास परमाणू ऊर्जा स्टेशन, कलपक्कम से जुडा संयंत्र देशमे BARC व्दारा अपूर्ति किए गए चंद्रह संयंत्रों मे से एक है | और 2004 तक इस पद पर रहे, अप्रैल मे श्रीकुमार बनर्जी को प्रसार सौंपा था | यह BARC के प्रमूख के रुप मे उनके कार्यकाल के दौरान, 21 जनवरी 2003 को कलपक्कम रिप्रोसेसिंग प्लांट मे एक दुर्घटना हुई, जिस्में छह BARC कर्मियों के विकिरण के सपर्क मे आयाथा |
बिस्वेश्वर भट्टाचार्यी इंडियन नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग INAE के निर्वाचित फेलो है | राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकारण मे परमाणू और रेडियोलॉजिकल अपात काल के पूर्व सदस्या है | उन्होंने भारत के परमाणू ऊर्जा आयोग के सदस्या के रुप मे भी काम किया है | उन्होंने रासायनिक धातूकर्म मे सिध्दांत का योगदान दिया है | सिध्दांत और अभ्यास 2006 मे प्रकाशित रासायनिक धातू विज्ञान पर एक पाठया पूस्ताक|
पूरस्कार और सम्मान :
1) भारत सरकार ने उन्हें 2001 मे उनकी सेवाओं के लिए पदमश्री के चौथे सर्वोच्चा नागरिक पूरस्कार से सम्मानित किया था |