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नाम : बीरेंद्र बिजॉय बिस्वास
जन्म तिथी : 1 मार्च 1928 आयू 91
ठिकाण : पश्चिम बंगाल, भारत
व्यावसाय : आणविक जीवविज्ञानी
प्रारंभिक जीवनी :
बीरेंद्र बिजॉय बिस्वास का जन्म 1 मार्च 1928 को पश्चिम बंगाल मे हुआ था | वह कलकत्ता विश्वाविदयालय के एक पूर्व छात्र थे | उन्होंने विश्वाविदयालय से वनस्पती विज्ञान मे स्त्रातक बीएससी और मास्टार एमएससी कि उपाधि प्राप्त कि थी | और 1952 मे बनारस हिंदू विश्वाविदयालय बी एचयू मे एक शोध सहायक के रुप मे अपना करियर शुरु किया था |
बीएचयू मे लेक्चरर के रुप मे अब वह 1954 मे बोस इंस्टीटयूट मे चले गए थे | बोस इंस्टीटयूट मे अपने शुरुआती वर्षो के दौरान उन्हेांने एसके रॉय के तहत डॉक्टरेट कि पढाई जारी रखी थी | 1957 मे कलकतता विश्वाविदयालय से पीएचडी कि उपाधि प्राप्ता कि थी | जिसके बाद अमेरिकामे पद के लिए चले गए |
कार्य :
बीरेंद्र बिजॉय बिश्वास एक भारतीय आणविक जिवविज्ञान अनुवंशिकिविदू और बोस संस्थान, कलकत्ता के पूर्व निदेशक है | उनहें न्यूक्लिक एसिउ के उपापचय और पादप कोशिकाओं मे प्रोटीन संश्लेषण के नियमन मे उनके योगदान के लिए जाना जाता है | वह भारतीय विज्ञान अकादमी और भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान आकादमी के एक निर्वाचित साथी है |
उन्हेांने मायर्स के मार्गदर्श्ंन मे और बाद मे रियर्ड अब्राम्स के तहत पिटसबर्ग विश्वाविदयालय मे ऑस्टीन मे टेक्सास विश्वाविदयालय मे काम किया था | 1961 मे भारत मे अपनी सेवा फिर से शुरु कि थी | और 1985 से 1990 तक निर्देशक के रुप मे संस्थान मे अपनी सेवाएं दी थी |
बोस इंस्टीटयूट मे बिस्वास ने आणविक जीव विज्ञान के अध्यायन का बीड उठाया था | और 1954 मे चयापचय मार्गा कि जांच मे रेडियोधर्मी यौगिको का उपयोग किया था | जबकी अमेरिका मे, वह प्रतिलेखन और मिथाइलेशन प्रकियाओं से जुडे आरएनए पोलीमरेज कि पहचान करने मे सफल रहे |
उन्हें एक चयापचय चक्र का प्रस्ताव दिया गया ,जिसने चार नए एंजाइमों कि पहचान करने मे सफलता कि थी| और उन एंजाइमेा मे से एक का उपयोग करने हुए उन्हेांने यह स्थापित किया की एक विशीष्ट फॉस्फोरिल समूह को IP6 से ADP सिंथेटीग एटीपी मे स्थानांतरति किया जा सकता है | एक नया एटीपी पीढी के लिए मार्ग् है |
उनके शोध ने उच्चा जिवों मे प्रतिलेखन प्रक्रिया के अध्यायन को आगे बढाने के लिए उन्होंने जैव रसायन विज्ञान के लिए एक विभाग कि स्थापना कि थी | वहाँ उन्हेांने अपने डॉकटरेट अध्यायन का आयोजन किया था उन्होंने इंडियन जर्नल ऑफ बायोकेमिस्र्ट्री एंड बायोफिजिक्सा के संपादकिय बोर्ड के सदस्या के रुप मे भी काम किया है |
पूरस्कार और सम्मान :
1) 1972 मे सर्वोच्चा भारतीय विज्ञान पुरस्कारों मे से एक शांति स्वरुप भटनागर पुरस्कार से सम्मानित किया था |
2) 1974 मे भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी INSA और एसबीसीआई श्रीनिवास पूरस्कार से सम्मानित|
3) 2008 मे पी सी महालनोबिस पदक से सम्मानित|
4) 1986 मे कलकत्ता विश्वाविदयालय से उन्हें प्रतिष्ठित शिक्षक पूरस्कार से सम्मानित |
5) 2001 मे डॉक्टरऑफ साइंस कि उपाधि से सम्मानित|
पूस्तके :
1) प्लांट माइक्रोब इंटरेक्शन|
2) मायोइनोसिटोल फॉस्फेट, फॉस्फोइनोसाइटस और सिध्गन ट्रांसडक्शन|
3) प्रोटीन संरचना कार्य और इंजिनियरिंग|
4) ट्रांसक्रिप्शन का नियंत्रण|
5) प्लांट जेनेटिक इंजिनियरींग