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वैज्ञानिक

श्रीनिवास रामानुजन की जीवनी - Biography of Srinivasa Ramanujan in hindi jivani

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नाम : श्रीनिवास रामानुजन

जन्म दि : 22 दिसंबर 1987

ठिकाण : इरोड, मद्रास प्रेसीडेंसी, ब्रिटीश भारत

पिता : कुप्पूस्वामी श्रीनिवास

व्यावसाय : गणितिय विश्लेषण, संख्या सिध्दांत, अनंत श्रृंखला और निरंतर अंश


प्रारंभिक जीवन :


        श्रीनिवास रामानुजन का जन्म 22 दिसंबर 1987 को हुवा था | उनका जन्म इराडे ब्रिटीश् भारत मे हुवा था | उनके पिता का नाम कुप्पूस्वामी श्रीनिवास था | उनकी माता कोमलतरमल वा एक गृहिणी थी | और वो एक स्थानीक मंदिर मे गाया करती थी | वे कुंभकोणम शहर के सारंगापानी सानिधि स्ट्रीट पर एक छोटे पारंपारीक घर मे रहते थे | उनका घर जेसा कि एक संग्रहालय था | जब रामानुजन डेढ साल के थे, तब उनकी माँ ने एक बेटे को जन्म दिया था | उनका नाम सदगोपन रखा था |


        जिसकी कुछ महिने बाद मृत्यू हो गई | दिसंबर 1889 मे रामानुजन ने चेचक का अनुबंध किया लेकिस इस समय के आसपास तंजापूर जिले मे बुरे साल मे मरने वाले 4000 अन्या लोगो के विपरित ठिक हो गए थे | वो अपने मॉ क साथा मद्रास के पास कांचीपूरम मे अपने माता पिता के साथ अपने घर चले गए | उनकी मॉ ने फिर दो बच्चों को जन्म दिया लेकिन वो दोनो कि मृत्यू होगई थी | 1 अक्टूबर 1892 को रामनूजन का स्थानीय स्कूल मे दाखिला हुआ | उनके नाना के कांचीपूरम मे एक आदालत के अधिकारी थे |


        लेकिन उन्हेांने नौकरी छोडी थी | रामानुजन और उनकी मॉ कुंभकोणम वापरस चले गए थे | जहा उन्हेांने रामानुजन का कंगायन प्राथ्मिक विघालय मे दाखिला हुवा | जब उसके नाना को मृत्यू हो गई थी तब उनके नाना नानी के पास भेज दिय गया था | और फिर मद्रास मे रहने लगे | उन्हे मद्रास मे स्कूल पसंद नही थे | उन्हेांने भाग लेने से बचने की कोशिश की उनके परिवार ने एक स्थानिक कांस्टेबल को यह सुनिश्चित करने के लिए सुचिबध्दा किया | वह स्कूल मे पढे एसा उनके पिता को लगता था | छह महिने के भीरत रामानुजन कुंभकोणम मे वापस आ गए थे |


        रामानुजन कगायन प्राथमिक विघालय मे अच्छा प्रदर्शन किया | 10 साल क‍ि उम्र से पहिले, नवंबर 1897 मे उन्होंने जिले मे सर्वश्रेष्ठा अंको के साथ अंग्रेजी तामिल भूगोल और अंकगणित मे अपनी प्राथमिक परिक्षाए उत्तीर्ण कि थी | उस वर्ष रामानूजन ने टाउन हाय सेर्केंडरी स्कूल प्रवेश किय था | जहाँ उन्हें पहिली बार औपचारिक गणित का सामना करना पडा था | उनहें 13 साल क‍ि उम्र मे अपने दम पर परिष्कृत प्रमेयो की खोज करते हुए इसमे महारत हासिल कि थी | 14 साल के थै, तब उनहे सर्टिफिकेट और एकेडमिक अवार्ड मिले थे |


        14 जुलाई 1919 को रामानुजन ने जानकी से शादी की थी | जो शादी के बाद उनकी उम्र दस साल कि थी | लडकियों के साथ शादिया करना असामान्या नही था | रामानुजन के पिता ने विवाह समारोह मे भाग लिया था | जैसा की उस समय आम था, कि शादी होने के तीन साल बाद उनकी अपने मायके मे ही रहती थी | शादी के बाद रामानुजन ने हाइड्रोसेल द्रूषण विकसीत किया गया था | उनहेाने प्रेसीउेंडी कॉलेज मे छात्रों को पढाया था | जो कि अपनी एकए परिक्षा क तैयारी कर रहे थे | मई 1919 मे मद्रास विश्वाविदयालय मे एक शोध पद प्राप्ता किया था |


कार्य :


        1910 मे रामानुजन डिप्टी कलेक्टर वी रामास्वामी आयर से मिले, जिनहेांने इंडियन मैथमेटिकल सोसायटी की स्थापना की थी | रामानुजन की विधियाँ इतनी गुढ और उपन्यास थी, | ओर उनकी प्रसूती मे इतनी गुढ और सटीकता की कमी थी , कि साधारण इस तरह के बौध्दिक जिमनास्टिक केलिए बेहिचक्र, शायद हि उनकी अनुसरण कर सके रामानुजन भी प्रदान कि थी |


        1912 की शुरुआत मे उनहे मद्रास भहालेखाकार कार्यालय मे रुपय मासिल वेतनन के साथ एक अस्थायी नौकरी मिली थी | रामानुजन के बॉस सर फ्रांसिस स्प्रिंग और एस नारायण अयर एक सहयोगी, जो भारतीय गणितीय सोसायअी के कोषाध्याक्ष थे | रामानुजन को उनकी गणितीय गतिविधयों मे प्रोत्साहित किया गया था |


        8 फरवरी 1913 को हार्डी ने रामानुजन को अपने काम मे रुचि व्यात करते हुए एक पात्र लिखा, जिसमे कहा गया था कि, यह आवश्याक है कि मुझे अपने कुछ प्रयासों के प्रमाण किया गया था | मद्रस मे रहते हुए भी रमानुजन ने अपने परिणामेां के योक को लोसेफ पेपर की चार पुस्तीकाओ मे दर्ज किया था | वे जादातर बिना किसी व्यात्पाति के लिखे गए थे | उन्होंने प्रख्यातता हासिल कि थी |


उपलब्धी :


1) रॉयल सोसाईटी के फेलो|

2) मेरिट सर्तिफीकेट और एकेडमिक अवार्ड