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नाम : सिसिर कुमार मित्रा
जन्म दि: 24 अक्टूबर 1890
ठिकाण : कोननगर
पत्नी : लीलावती बिस्वास
व्यावसाय : आयनमंडल पर काम करते है |
प्रारंभिक जीवन :
सिसिर कुमार मित्रा का जन्म 24 अक्टूबर 1890 मे हुवा था | उनका जन्म कोननगर मे हुवा था | उनके पिता का नाम जॉयकृष्णा मित्रा था | सिसिर कुमार तीसरे पुत्र थे | उनके पिता जब सिसिर कुमार के जन्म के समय वो एक स्कुली छात्र थे | और एक मेडिकल छात्र शरतकुमारी भी थी | और उनका परिवार मदनापूर से आया था | उनके चैतक परिवार रुढिवादी हिंदू थै |
और उनके मॉ का परिवार प्रगतशिल ब्रम्ह समाज से अनुयायी था | सिसिर कुमार के पिता क्रम्ह समाज से शामिल हो गए और उन्हेांने आपनी शादी ब्रम्हनी लडकी से कि | ए उनके घर को पसंद नही था | फिर भी उनहोंने उनके खिलाफ जाके शादी की | और वो परिणामस्वरुप नवविवाहित दंपति शरत कुमारी थे एक सतीश कुमार और दूसरा संतोष कुमार था | ओर शरत कुमार था |
आपने बचपन और किशोरवस्था के दौरान, मित्रा जगदीश चंद्र बोस साहित कुछ समय बंगाली वैज्ञानिकों व्दारा लोकप्रिय वैज्ञानिक लेख पठने के माध्याम से विज्ञान मे अपनी रुचि का पोषण किया था | भालापूर जिला स्कूल से अपनी परिक्षा पास हुवा | और फिर कुद समय बाद मे उनके पिता जॉयकूष्ण कि मृत्यू हो गई |
1908 मे एफए परिक्षा उत्तीर्ण हो गए | मित्रा को कलकत्ता विश्वाविदयालय मे प्रेसीउेंसी कॉलेज मे एक छात्र के रुप मे भर्ती कराया गया जहाँ उनहोंने बीएसीपास किई | उन्होंने भौतिक और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए एक जुनून विकसित करना जारी रखा | टज्ञैर जगदीश बोस व्दारा 1912 मे सर्वोच्चा सम्मान के साथ आपनी मास्टार डिग्री पूरी करने पर एक शोध विवदान के रुप मे स्वीकार किया गया |
कार्य :
सिसिर कुमार मित्रा कोलकता लौटन के बाद उनहोंने विश्वाविदयालय का खौर भौतिक का प्रेाफेस नियूक्ता किया गया | मित्रा ने कलकत्ता विश्वाविदयालय मे एक नया विभाग भी शुरु कया था | ओर बाद मे वो रेडियों भौतिक और इलेक्ट्रॉनिक्सा संस्थान बन गया था | 1955 मे उनहेांने एमरियस प्रोफेसर बनकर विश्वाविदयालय से संव्यास ले लिया | मित्रा ने प्रस्ताव दिया किय सूर्य से पराबैंगनी प्रकाश ने आयमंडल के माध्या था ई परत का निर्माण किया | 1947 मे उनहोंने वायुमंडलीय अनुसंधान पर अर एटमॉस्कीयर नामक एक संदर्भ ग्रंथ प्रकाशित किया गया था |
उपलब्धी :
1) 1938 मे द ऑर्डर ऑफ द ब्रिटीश एम्पायर एमबीई के सदस्या पूरस्कार |
2) 1958 मे रॉयल सोसायटी की फैलोशिप पूरस्कार |
3) 1962 मे पदभुषण पूरस्कार |
4) 1962 मे राष्ट्रीय प्रोफेसरशिप पूरस्कार |
5) 1959 :60 के बीच मे भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी की अध्यक्षता पूरस्कार |
6) 1951:53 के बीच मे एशियाटि सोसायटी की अध्यक्षता पूरस्कार |
7) 1935 मे भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी एफ एन1 के फेलो पूरस्कार |