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नाम : सैयद जहूर कासिम
जन्म दि : 31 दिसंबर 1926
ठिकाण : इलाहबाद, संयुक्ता प्रांत ब्रिटीश भारत
व्यावसाय : समुद्री जीवविज्ञानी
मृत्यू : 20 अक्टूबर 2015
पिता : सैयद जमीर कासिम
प्रारंभिक जीवन :
सैयद जहूर कासिम का जन्म 31 दिसंबर 1926 को हुआ था | उनका जन्म इलाहाबाद के रुक्सावारा गांव मे हुवा था | उन्हेांने अपनी प्रारंभिक शिक्षा माजिदिया इस्लामिया इंटरमिडिएड कॉलेज इलाहाबाद से पुरी की थी | और फिर 1947 मे अलीगढ मुस्लिम विश्वाविदयालय मे दाखिला लिया था | उन्हेांने 1949 मे एएमयू अलीगढ से बी एससी की डिग्री पास की थी | और फिर उसी विश्वाविध्यालय से जुलॉजी मे एम एस सी की पढाई पूरी कि थी | जहॉ उनका प्रथम क्रमांक आया था | उन्हें युनिवर्सिटी गोल्उा मेडल से सम्मानित किया गया था |
जहुर काशिम जुलॉजी विभाग मे एएमयू मे व्याख्याता रह चुके थे | और फिर 1953 मे उच्चा अध्यायनन के लिए युनाइटेउ किंगडम चले गए थे | उन्हेांने नॉर्थ वेल्सा के युनिवर्सिटी कॉलेज मे दाखिला लिया था | और 1956 मे डी एस सी और पीएचडी की थी | वो भारत मे दिसंबर 1956 मे एएमयू मे फिर से शामिल हुए थे और बाद मे 1957 मे एक पाठक बन गए थे | उन्होंने तब समुद्री विज्ञान के क्षेत्र मे अपने कायौ मे सुधार के लिए अपने विभाग मे मछली और मत्सा पालन की एक नई प्रयोगशाला शुरु कि गई थी |
डॅा कासिम ने 1962 मे केंद्रीय मत्स्या शिक्षा संस्थान, बॉम्बे मे मत्स्या जीव विज्ञान पठाया था | 1964 मे उन्होने वैज्ञानिक और औघोगिक अनुसंधान परिषद CSIR के तहत अंतर्राष्ट्रीय हिंद महासागर अभियान IIOE मे एक साहायक निदेशे के रुप मे शामिल हो गए थे | जहाँ उन्होंने केरल बैकवाटर्स कि प्राथमिक उत्पादकता और लक्षव्दीप के एटोल पर जैविक समुद्रा विज्ञान पर अपना शोध किया था | उनके साथ उन्होंने लगभग एक साल तक कोच्चि के केंद्रीय मत्स्या प्रौघोगिकी संस्थान का एक प्रभारी बनाए रखा था |
कार्य :
सैयद जहुर कासिम एक भारतीय समुद्री जीवविज्ञानी थे | कासिम ने अंटार्कटिका के लिए भारत की खोज का नेतृत्वा करने मे मदत की और 1981 से 1988 तक अन्या सात अभियानों का मार्गदर्शन किया था | वह 1991 से 1996 तक भारत के योजना आयोग के सदस्या थे | 1989 से 1991 तक जामिया मिल्लिया इस्लामिया के कुलपति थे | 1953 मे उच्चा अध्यायन के लिए युनाइटेड किगडम मे आगे बढने से पहले अलीगढ मे जुलॉजी विभाग मे व्याख्याता थे |
उनहेांने मत्स्या जिवविज्ञान, प्राथमिक उत्पाकदता समुद्री: संस्कूति विशेष रुप से मुसल और पर्ल कल्चर, एस्टुरीन परिस्थितिकी और पर्यावरण प्रदूषण पर बडे पैमाने पर शोध किया था | जिस पर 200 से अधिक शोध पत्र राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं मे प्रकाशित हुए है | डॉ.स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन डीएमआरएफ की स्थापना मुख्या रुप मे डॉ कासिम ने अपने सहयोगियों की मदद से कि थी | भारत मे पहली बार मसल्सा कल्चार और मोती कल्चार तकनीक विकसित किया था | उनका हद्रद निश्चय उन्हे गोवा के राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान NIO के निदेशक के पद पर ले गया था |
उपलब्धी :
1) 1974 मे पदमश्री|
2) 1978 रफी अहमद किदवर्ह पूरस्कार|
3) 1988 मे लाल बहादूर शास्त्री पूरस्कार|
4) 1999 मे ओशनोलॉणी इंटरनेशनल लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड युके|
5) 2003 मे भारत सरकार व्दारा पहला राष्ट्रीय महासागर विज्ञान और प्रौघोगिकी पूरस्कार|
6) 2005 मे एशियन सोसाइटी गोल्ड मेडल|