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नाम : प्राण नाथ
जन्म तिथी : 1939
ठिकाण : पश्चिम पंजाब, भारत
व्यावसाय : भौतिक विज्ञानी
प्रारंभिक जीवनी :
प्राण नाथ उत्तार पूर्व विश्वाविघ्यालय मे एक भौतिक विज्ञानी है | जिसके पास प्राथमिक करण भौतिकी मे शोध है | उनके पास एक मैथ्यू गणमान्या विश्वाविघ्यालय के प्रोफेसर कि कुर्सी है | प्राण नाथ का जन्म पश्चिम पंजाब, भारत मे सन 1939 मे हुआ था |
वह कश्मीरी वंश से थे | उन्होंने दिल्ली विश्वाविघ्यालय से विज्ञान मे स्त्रातक कि उपाधि प्रातपा कि है | सन 1964 मे उन्होंने स्टैनफोर्ड विश्वाविघ्यालय से अपनी पीएचडी कि उपाधि प्राप्ता कि थी |
कार्य :
प्राण नाथ ने 1964 से 1965 तक कैलिफोनिया विश्वाविघ्यालय रिवरसाइड मे पढाया है | उसके बाद वह 1966 तक पिटसबर्ग विघ्यालय मे एंडूयूमेलन फेलो रहे थे | उन्हेांने टीनएनआरआर, मुंबई मे संयूक्ता रार्ष्ट विकास कार्यक्रम के तहत कैलीफोर्निया विश्वाविधालय सांता बारबरा बॉन, सर्न डीलबर्ग और म्यूनिख मे पदो का दौरा किया है |
प्राण नाथ 1975 मे गॉज थ्योरीज एंड मॉडर्न फिल्ड थ्योरी और सन 1990 मे वार्षिक पीएएससीआएस संगोष्ठी के संस्थापक कुर्सी रहे है | इतना ही नही बल्की वह 1993 मे वार्षिक एसयूएसवाय सम्मेलन मे संस्थापक अध्याक्ष कि सह अध्याक्ष रहे थे |
वह 1975 मे पहले सूपरग्रेविटी सिध्दांत के प्रवर्तको मे से एक है | उन्हेांने 1982 मे रिसर्ड अर्नेाविट और अली हानी चाम्सडाइन के सहयोग से सूपरग्रेवीटी और सूपरग्रेविटी भव्या एकीकरण के क्षेत्र को विकसित किया है |
उन्हेांने सी पी उल्लींघन के अध्यायन के माघ्याम से क्षेत्र के आगे विकास मे योगदान दिया है | उनका प्रारंभिक कार्य प्रभावी लैग्रेन्जियन विविधके अविष्कार चिंता करता है | जो वियोन पियोन बिखरेन का पहला वर्तमान बीजगणित विश्लेषण और कुख्यात यू समस्या का समाधान है | उन्होंने एकीकृत मॉडलो मे प्रोटॉन कि स्थिरता पर अध्यायन मे भी योगदान दिया है |
उपलब्धि :
पूरस्कार और सम्मान :
1) 1999 मे प्राण नाथ को सूपरसिमेट्री और सूपरग्रविटी मे बूनयादी योगदान के लिए अलेक्जेंडर वॉन हम्बोल्ट पूरस्कार से सम्मानित किया गया है |
पुस्तक/ग्रंथ :
1) 14 डिसेंबर 2016 सूपरसिमेट्री सूपरग्रॅवीटी एंड युनीफीकेशन|
2)1984 अप्लाइड एन: 1सूपरग्रॅविटी |