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नाम : पाइलोर कृष्णैर राजगोपालन
जन्म :
ठिकाण : मुक्लेश्वर, कुमाऊं मंडल, उत्तराखंड, भारत
पत्नि : श्रीमती लीला राजगोपालन
व्यावसाय : वेक्टर नियंत्रण वैज्ञानिक, एक्रोलॉजिस्टा
प्रारंभिक जीवनी :
पी के राजगोपालन का पूरा नाम पाइलोर कृष्णैर राजगोपालन है | वह एक भारतीय वेक्टर नियंत्रण वैज्ञानिक, जीवविज्ञानी और एक्रोलॉजिस्टा है | उनहोंने वेक्टर जनित बीमारियों के खिलाफ नियंत्रण कार्यक्रमो मे उनके अग्रणी योगदान के लिए जाना जाता है |
पी के राजगोपालन का जन्म भारत मे उत्तराखंड राजया मे मुक्लेश्वर गांव मे हुआ है | उनके पत्नी का नाम श्रीमती लीला राजगोपालन है |
उन्होंने सन 1949 मे बनारस हिंदू विश्वाविघ्यालय से स्त्रातक कि उपाधि प्राप्ता कि है | सन 1951 मे उन्हेांने जूलॉजी मे परास्त्रातक कि उपाधि प्रापता कि है | उन्हेांने कॉलेज पार्क मे मैरीलैंड विश्वाविघ्यालय से एकोलॉजी मे डिप्लोमा प्राप्ता किया है | उन्होंने पूणे विश्वाविघ्यालय से वैक्टर को फैलोमिमे प्रवासी पक्षियों की भूमिका पर डॉक्टरेट कि उपाधि प्राप्ता कि |
कार्य :
राजगोपालन ने नई दिल्ली मे मच्छारों के आनुवंशिक नियंत्रण पर विश्वा स्वास्था संगठन परियोजना के लिए एक वरिष्ठा वैज्ञानिक के रुप मे काम किया है | सन 1975 मे उन्हेांने पंडिचेरी मे वेक्टर नियंत्रण अनुसंधान केंद्र कि स्थापना कि है | उनके नेतृत्वा मे व्हीसीआरसी ने बर्दवान जिले मे जापानी इंसेकेलाइटिस के नियंत्रण मे महत्वापूर्ण योगदान दिया है |
उनहोंने पूरी दुनिया मे बडे पैमाने पर यात्रा कि है | राजगोपान एक रॉकफेलर फेलो थे | डब्ल्यूएचओ के एसटीएसी के सदस्या के रुप मे भी उन्हेांने कार्य किया है | मलेरिया, फाइलेरिया और वेक्टर नियंत्रण पर डब्ल्यूएचओ विशेषज्ञ समितीया डब्ल्यूएचओ स्टीयरिंग कमेटी ऑफ टांडीआर फाइलेरियासि एंड बायोलॉजिकल कंट्रोल ऑफ वैक्टर पर और श्रीलंका इंडोनेशिया और वियतनाम मे मेलेरिया नियंत्रण के लिए डब्ल्यूएचओ के सलाहकार के रुप मे वेकार्यरित रहे है |
राजगोपालन ने विश्वा स्वास्था संगठन को फाइलेरियासिस पर अपनी स्टीयरिंग समितीयों के सदस्या और वैक्टर के जैविक नियंत्रण के रुप मे कार्य किया है | राजगोपालन रॉयल सोसाइटी ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन युके के साथी रहे है |
उपलब्धि :
पुरस्कार और सम्मान :
1) सन 1980 मे राजगोपालन को आयसीएमआर का पीएनआरंजेयू ओरेशन अवार्ड दिया गया है |
2) सन 1985 मे उन्हें ओम प्रकाश असीम पूरस्कार से सम्मानित किया गया है |
3) सन 1988 मे राजगोपालन को चार्ल्स विश्वाविघ्यालय प्राग व्दारा स्वर्ण पदक दिया गया है |
4) 1989 मे राजगोपालन रॉयल सोसाइटी ऑफ बायोलॉजी के फेलो थे |
5) 1990 मे राजगोपालन द रॉयल सोसाइटी ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन व्दारा चुने हुऐ फेलो थे |
6) 1990 मे उनहें राष्ट्रपति आर वेंकटरमनव्दारा पघश्री पुरस्कार से सम्मानित कीया गया था |
पूस्तक/ग्रंथ :
राजगोपालन ने सेवा मे रहते हुए 200 से अधिक वैज्ञानिक पत्र प्रकाशित किए है |
1) 1991 प्रकाशित लिम्फैटिक फाइलेरियासिस का इम्यूनोएपिडेमियॉलाजी द रिलेशनशिप इन इंफेक्शन एंड डिजीज|
2) 1992 प्रकाशित पांडीचेरी दक्षिण भ्ंारत मे बैनक्रााफिटयन फायलेरियासिस वेक्टर आबादी कि वसुली का महाामारी विज्ञान प्रभाव|
3) 1993 प्रकाशित लसीका फाइलेरियासिस निदान और रोगजनन|