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नाम : मीनाक्षी बनर्जी
ठिकाण : भारत
व्यावसाय : साइनोबैक्टीरियोलॉजिस्टा
प्रारंभिक जीवन :
मीनाक्षी बनर्जी एक भारतीय साइनोबैक्टीरियोलॉजिस्टा है | वह बरक तडल्ला विश्वाविध्यालय, भोपाल के बायोसाइंस विभाग के पूर्व प्रमूख है | मीनाक्षी ने अपनी स्कुली शिक्षा आयरिश कॉन्वेंट लोरेटी, आसनसोल से पूरी की है | उसके बाद उन्हेांने रांची विश्वाविघ्यालय के निर्मला कॉलेज से विज्ञान मे पढाई की |
उन्होंने बनारस विश्वाविघ्यालय के महिला कॉलेज से स्त्रातक कि डिग्री प्राप्ता कि है | वहाँ उन्होंने वनस्पति विज्ञान का अध्यायन किया है | वनस्पाति विज्ञान विषय मे उन्हें अधिक रुची थी | इसिलीए उन्हेांने उसमे ही स्त्रातकोंत्तर किया | इसी समय उन्हें साइनोबैक्टिरिया मे अपनी रुची विकसित होने लगी थी | फीर आगे चलकर उसे साइनोबैक्टिरियोलॉजिस्टा बनने का अवसर प्राप्ता हुआ |
कार्य :
बनर्जी 1989 मे बरकतुल्लाह विश्वाविघ्यालय मे व्याख्याता के रुप मे शामिल हुई | मीनाक्षी ने 1997 मे रीडर के रुप मे कार्य किया है | 2005 मे मीनाक्षी ने प्रोफेसर के रुप मे भी कार्य किया है |
वर्तमान मे उनकी रुची अल्ग बायोफर्टिलायइजर पर औषधीय पौधो की दुर्लभ किस्मों के प्रसार के लिए व्यापक शोध मे है | इतना ही नही बल्की अभी वो शोध कर रही है की, ठंड और गर्म रेगिस्तान सहित विभिन्ना अवासों से अव्दितीय सायनों बैक्टीरिया के अध्यायन जहा ये जीव जीवन की सीमा पर रहते है | मीानाक्षी सेंटर फॉर एप्लाइड अलगल रिसर्च के प्रमूख के रुप मे काम करती है |
उपलब्धी :
मीनाक्षी को अपने रिसर्च के योगदान के लिए विभिन्ना पूरस्कार मिले है |
पूरस्कार और सम्मान :
1) मीनाक्षी को 2010 को केएन काटजू राजया स्तारीय विज्ञान पुरस्कार प्राप्ता हुआ है |
2) मीनाक्षी बजर्नी नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज इंडिया की सदस्या है |
3) मिनाक्षी को सांसद युवा वैज्ञानिक पूरस्कार से सम्मानित किया गया है |
पूस्तक :
मीनाक्षी ने 30 नवंबर 2005 मे बायोटेक्नॉलॉजी पुस्तक प्रकाशित किया है |