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नाम : महेंद्र सिंह सोढा
जन्म : 08 फरवरी 1932
ठिकाण : भारत
व्सावया : प्रोफेसर प्ला्जमा भौतिकी सिदधांत
प्रारंभिक जीवन :
महेंद्र सिंह सोढा को अधिककर एम एस सोढसा के नाम से जाना जाता है | वह प्ला्जमा ऑप्टिक्सा और एनर्जी के विशेषज्ञ है | एम एस सोढा का जन्म 08 फरवरी 1932 मे हुआ था | सन 1951 मे उन्होंने इलाहाबाद विश्वाविध्यालय से भौतिकी मास्टार डिग्री एमएससी हासिल की | उन्होंने रक्षा विज्ञान प्रयोगशाला नई दिल्ली से लेजर साइंड एँड टेक्नोलॉजी से जुडकर एक वैज्ञानिक के रुप मे कार्य शुरु किया |
उन्होने अपने करियर के साथ साथ ही डॉक्टरेट की पढाई भी जारी रखी और सन 1955 मे उसी विश्वाविध्यालय से अपनी डॉक्टरेट की उपाधिी भी प्राप्ता कि थी | सन 1956 तक महेंद्र सिंग डीसएसल मे रहे और सन 1958 तक वहाँ रहने के लिए वे ब्रिटीश कोलंबिया विश्वाविध्यालय जो की कॅनडा मे है, वहा चले गए थे, वहॉ उन्हेांने पोस्टा डॉक्टरेल फेलो के रुप मे थे | इसके बाद वे युएसए मे स्थानांतरित हो गए |
युएसए मे महेंद्र सिंह सोढा शिकागो मे 1961 तक आर्मर रिसर्च फाउंडेशन, के वरिष्ठा वैज्ञानिक के रुप मे कार्यरत रहे | न्यूयॉर्क मे वे एक वरिष्ठा वैज्ञानिक और रिपब्लिकन एवेएशन कंपनी मे भौतिकी के प्रमुख के रुप मे भी कार्यरत रहे | कुछ समय पश्चात वे अपने मातृभूमि भारत लौट आए | भारत मे वे एक प्रोघोगिकी संस्थान दिल्ली मे प्रोफेसर के रुप मे सहभागी हो गए थे | जहॉ पर वे रैंक मे डीन के प्रमूख रहे | इसके बाद 1992 मे अपनी सेवानिवृत्ती तक वे संस्था के उप निदेशक बने |
कार्य :
प्रोफेसर महेंद्र सिंह सोढा ने ऊर्जा अध्यायन केंद्र ऑप्टों इलेक्ट्रॉनिक्सा समुह और प्ला्जमा भौतिकी समूह जैसें प्रभागो मे बहुमूल्या योगदान दिया है | सोढा ने प्लाजमा और ऊर्जा के भौतिक विज्ञान विषयों मे व्यापक शोध किया है | उन्होंने 1988 से 1992 तक देवी अहिल्या विश्वाविघ्यालय के कुलपति के रुप मे कार्य किया है |
1992 मे उन्हे 1992 से 1995 तक तीन साल के कार्यकाल के लिए लखनऊ विश्वाविघालय के कुलपति के रुप मे नियुक्ता किया गया था | उसके बाद उन्हें बरकतुल्लाह मे भी नियुक्ता किया गया था | 1998 से 2000 तक उन्होने ड्रेक्सेल विश्वाविघालय मे एक विजिटिंग प्रोफेसर के रुप मे भी कार्य किया है | वे लखनऊ विश्वाविध्यालय के प्रोफेसर और रमन्ना फेलो है | महेंद्र सिंह ने प्लाजमा साइंस सोसाइटी ऑफ इंडिया और ऑप्टिकल सोसायटी ऑफ इंडिया के अध्याक्ष के रुप मे कार्य किया है |
उपलब्धि :
प्रोफेसर सोढा ने प्लाजमा और ऊर्जा के भौतिक विज्ञान विषयों मे गहन शोध किया है | इसिलीए उन्हे कोलाइडल प्लाजमा ऑप्टिक्सा और अखमनोव के निर्माण के लिए सबसे पहले यानि अग्रणी शोध का श्रेय दिया जाता है |
पूस्तके :
प्रोफेसर महेंद्र सिंह सोडा ने स्तारित मीडिया मे छवि मर्नाण के मात्रात्माक सिध्दांन्तापर कागजात प्रस्तूत किए थे | प्रोपुेसर सोढा लिखित पुस्तक माइक्रोफेग्मेटेंश्ंन इन फेरिमैग्रेटिक्सा को इस विषय पर पहिली पुस्तक माना जाता है | उनहोने क्रॉप ड्रायिंग सोलर डिस्टिीलेशन और सोलर पैसिव बिल्डिंग साइंस एंड डिजाइन सहित 13 पुस्तकें प्रकाशित कि है |
पूरस्कार सम्मान :
1) महेंद्र सिंह सोढा को अपने भौतिक विज्ञान के लिए सन 1974 मे सर्वोच्चा भारतीय विज्ञान पूरस्कार शांति स्वरुप भटनागर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है |
2) सन 2002 मे वर्ल्ड रिन्यूएबल एनर्जी नेटवर्क और यूनेस्को से अक्षय ऊर्जा पुरस्कार मे पायनियर हूए है |
3) महेंद्र सिंह सोढा को 21 मार्च 2011 को इंडियन ऑफ टेक्नोलॉजी, दिल्ली व्दारा ऑनर द मेंटर कार्यक्रम मे सम्मानीत किया गया था |