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नाम : दिवान सिंह भाकुनी
जन्म तिथी : 30 दिसंबर 1930
ठिकाण : उत्तरप्रदेश, भारत
व्यावसाय : रसायनतज्ञ
प्रारंभिक जीवनी :
दिवान सिंह का जन्म 30 दिसंबर 1930 को भारत के उत्तरप्रदेश मे हुआ था | उनहेांने इलाहाबाद विश्वाविघ्यालय से रसायन शास्त्र किया था | और उसी संस्थान मे मास्टार डिग्री हासिल कि थी | उन्हेांने 1955 मे एक शिक्षण संकाय से रुप मे अपना करियर शुरु किया था |
लेकिन एक साल बाद, सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीटयूट सीडीआरआई लखनऊ मे शामिल हो गए थे | वहाँ तीन साल तक काम किया | उनका अगला कदम 1962 मे नेशनल बोटैनिकल रिसर्च इंस्टीटयूट था, लेकिन बाद मे अपने डॉक्टरेट कि पढाई कि लिए यूके चले गए |
कार्य :
दिवान सिंह एक भारतीय प्राकृतिक उत्पाद रसायनतज्ञ स्टीरियों कैमिस्टा और सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीटयूट के पूर्व महानिदेशक वैज्ञानिक है | उन्हे अल्कलॉइडस के जीवजनन पर आपने शोध के लिए जाना जाता है |उन्होंने 1965 मे इंपीरियल कॉलेज लंदन के सर डेस्के बार्टन, एक प्रसिध्दा कार्बनिक रसायनतज्ञ और 1969 के नोबेल पुरस्कार विजेता के मार्गदर्शन मे लंदन विश्वाविदयालय से पीएचडी कि उपाधि प्राप्ता कि थी |
1978 मे लंउन विश्वाविघ्यालय से डॉक्टरेऑफ साइंस का भी प्राप्ता कि थी | भारत लौटते हुए, उनहेांने 1965 मे सीडीआरआई जवाइन किया जहाँ उन्हेांने अपने अधिकारिक कैरियर के बाकी 1990 मे एक महानिदेशक वैज्ञानिक के रुप मे 1990 तक काम किया था | उन्हेांने यूनिवर्सिटी ऑफ कॉन्सेपियोन, चिली मे एक विजिटिंग प्रोफेसर के रुप मे एक स्टेंट किया था | सेवानिवृत्ती के बाद, उन्हे वैज्ञानिक और औधोगिक अनुसंधान परिषद व्दारा एक उभरते वैज्ञानिक के रुप मे चुना गया था |
भाकूनी ने अपने सक्रीय शोध के दौरान, कई स्वदेशी पौधो कि संरचना और रुढिवादिता का अध्यायन किया था | और जैविक रुप से सक्रीय यौगिकों का पता लगाने के लिए उन्हें संश्लेषित किया: एन्कलॉइड के जैवजनन पर उनका काम इन परिक्षाओं पर आधारित था |
वह मास स्पेक्ट्रोमेट्रिक और परमाणू चुंबकीय अनुनाद स्पेक्ट्रोस्कोपी तकनीकों के माध्याम से कई पौंधेा के कैंसर रोधी, एंटी लीशमैनियल एंटी वायरल और एंटी एलर्जी गुणो कि पहचान करने मे सक्षम था | वह इंडियन केमिकल सोसायटी 1996: 97 और भारतीय विज्ञान कॉग्रेस एसोसिएशन 1994 कि अनुभागीय समिती के पूर्व अध्याक्ष और 1982 से 1984 तक भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी कि परिषद मे बैइै रहे थे |
पूरस्कार और सम्मान :
1) वैज्ञानिक ओर औधोगिक अनुसंधान परिषद ने भाकुनी के 1975 मे सर्वोच्चा भारतीय विज्ञान पूरस्कारों मे से एक शांति स्वरुप भटनागर पूरस्कार से सम्मानित किया था |
2) यह विश्वाविदयालय अनुदान आयोग के राष्ट्रीय व्याख्याता 1982
3) सर सी वी 1989 मे रमन अवाड्र से सम्मानित
4) उन्हे 2000 मे आचार्य पी सी रे मेमोरियल अवार्ड के भी प्राप्ताकर्ता है |
5) उन्हे 1993 मे प्लेटिनम जुबली लेक्चर और बॉम्बे यूनिवर्सिटी के डॉ आर सी शाह मेमोरियल लेक्चर उनमे से कुछ उल्लेखनीय है |
पूस्तक :
1) बायेाएक्टिव समुद्री प्राकृतिक उत्पाद 2006|