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नाम : दीजेंद्र कुमार रे चौधुरी
जन्म तिथी : 1 नवंबर 1933
ठिकाण : भारत
व्यावसाय : प्रौफेसर
प्रारंभिक जीवनी :
दिजेंद्र कुमार का जन्म 1 नवंबर 1933 को भारत मे हुआ था | उन्हेांने एमएससी की पढाई 1956 मे कलक्त्ता विश्वाविघ्यालय से गणित कि थी | और चैपल हिल मे यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलिना से कॅाम्बिनेटरिक्सा 1959 मे पीएचडी कि डिग्री हासिल कि थी |
कार्य :
व्दिजेंद्र कुमार रे चौधुरी ओहियो स्टेट युनिवर्सिटी मे प्रोफेसर एमेरिटस है | उनहेांने और उनके छात्र आरएम विल्सान ने मिलकर 1968 मे किर्कमैन कि छात्रा समस्या को हल किया था | जिसने डिजाइन सिध्दांत के विकास मे योगदान दिया था | उन्होंने ओहियो स्टैट यूनिवर्सिटी मे कॉर्नेल मेडिसिन और केंटरिंग के गणित विभाग के प्रोफेसर और गणित विभाग के अध्याक्ष के रुप मे कार्य किया था |
वह जर्मनी के यूनिवर्सिटी ऑफ गोटिंगेन और जर्मनी के अर्लेजेन विश्वाविघ्यालय के विजीटिंग और जर्मनी के अर्लेंजेन विश्वाविघ्यालय के विजिटिंग प्रोफेसर भी रहे है |
उन्हे डिजाइन सिध्दांत और त्रुटि सूधार कोड के सिध्दांत मे अपने काम के लिए जाना जाता है | जिसमे कोड का वर्ग अंशिक रुप से उनके और उनके पीएचडी सलाहकार बोस ने कार्य किया था |
रे चौधूरी इंस्टीटयूट ऑफ कॅम्बिनेटरिक्सा मे उनक करियर योगदान के लिए इसके अन्रप्रयोग है | 2012 मे वह अमेरिकन मैथमैटिकल सोसायटी के साथी बने थे | 2000 मे उनके 65 वे जन्मदिन के अवसर पर एक उत्साव का आयोजन हुआ था |
पूरस्कार और सम्मान :
1) जर्मनी के हम्बोल्ट फाउंडेशन का वरिष्ठ अमेरिकि वैज्ञानिक पूरस्कार से सम्मानित|
2) ओहियो स्टैट यूनिवर्सिटी से प्रतिष्ठित वरिष्ठा अनुसंधान पूरस्कार|
3) नई दिल्ली मे फोरम के अध्याक्ष|
4) आईसीए के यूलर मेडल 1999|
5) अमेरिकन मैथमैटिकल सोसायटी के साथी बने|
पूस्तके :
1) बाइनरी गुप कोडस को सही करने वाली त्रुटि के एक वर्ग पर 1960|
2) फाइल संगठन की योजनाएं परिमिती जयामितीथताओं पर आधारित है 1968|
3) किर्कमैन कि छात्रा कि समस्या का समाधान 1971|
4) टी डिजाइन पर 1975