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नाम : दिपक माथूर
जन्म तिथी : 8 अप्रैल 1952 आयू 67
ठिकाण : भारत
व्यावसाय : परमाणू भौतिक विज्ञानी
प्रारंभिक जीवनी :
दिपक माथूर का जन्म 8 अ्रपैल 1952 को हुआ था | और उन्होंने 1973 मे लंदन विश्वाविघ्यालय मे इंजीनियरींग मे अपनी स्त्रातक कि पढाई पूरी कि थी | उनहेांने जॉन हेकट के मार्ग्दर्श्ंन मे ब्रिटीन मे बिर्कबेक कॉलेज मे डॉक्टरेट कि पढाई जारी रखी थी | 1976 मे अपनी पीएचडी कि सुरक्षा के लिए उन्हेांने 1976: 78 के दौरान लंदन विश्वाविघ्यालय के भौतिकी और खगोल विज्ञान विभाग मे हर्री मैसी के तहत अपना डॉक्टरेट अनुसंधान किया था |
कार्य :
दिपक माथूर एक भारतीय आणविक और परमाणू भौतिक विज्ञानी है | और हाल हि मे टाटा इंस्टीटयूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च मे एक प्रतिष्ठित प्रोफेसर है | वह वर्तमान मे मणिपाल विश्वाविघ्यालय मे परमाणू और आणविक भौतिकी विभाग मे जैसी बोस नेशनल फेलो है | आणविक और जैविक भौतिकी पर अपने शोध के लिए जाना जाता है | 1978 मे अपने अल्मा सेंटर, बिकॉक कॉलेज मे एक शोध अधिकारी के रुप मे अपना करिअर शुरु किया था |
तीन साल बाद, वह टाटा इंस्टीटयूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च मे एक संकाय पद लेने लिए भारत लौट आए थे | वह परमाणू और आणविक विज्ञान प्रयोगशाला मे प्रमूख अन्वेषक और संरचान के विशिष्टा प्रोफेसर के रुप मे कार्य करते है | उनहेांने बेसिक साइंसेज मे सेंटर फॉर एक्सीलेंस को 2007 मे मुंबई विश्वाविघ्यालय के तहत एक सायत संस्थान के रुप मे सथापित किया गया था |
तो वह इसके संस्थापक के रुप मेस्थापित किया गया था | तो वह इसके संस्थापक निदेशक बने और कूछ समय के लिए इस पद पर रहे थे | उनहेने परमाणू और आणविक भौतिकी केंद्र माणिपाल विश्वाविघ्यालय और कई विश्वाविदयालयों और संस्थानों मे एक विजिटिंग प्रोफेसर के रुप मे एक सहायक प्रोफेसर के रुप मे भी कार्य करता है |
हार्सी मैसी के साथ अपने पोस्टा डॉक्टरेट काम के दौरान माथूर का ध्यान एक आयन जाल के भीतर इलेक्ट्रॉन आयत अक्क्र प्रयोगो पर था | बाद मे उन्हेांने एक ऊर्जा स्पेक्ट्रोमेट्रिक तकनीकि विकसति करके अपने प्रयोगो को आगे बढाया था | उन्हेांने अन्या प्रयोगशाला उपकरणों को भी विकसित किया है | और उन्हें अलगअलग मेटा टेबल मल्टीप्ल चार्ज आणिवक आयनों के एक वर्ग के साथ श्रेय दिया जाता है |
सेंटर फॉर एक्सीलेंस इन बेसिक साइंसेज संसापक निदेशक के रुप मे कार्य किया था | माथूर को संस्थान शोध अिाधारित एकीकृत मास्टार कार्यक्रम स्थापित करने के लिए जाना जाताहै | और उनहेांने इंटरनेशनल यूनियन ऑफ प्योर एंड एप्लाइड फिजिक्सा के परमाणू आणविक और ऑप्टिकल भौतिकी पर सी : 15 पर आयोग कि उपाध्याक्ष का पद संभाला है |
उनहोंनने एशियन इंटेस लेजर नेटवर्क कि सह अध्याक्षता कि है | और अल्ट्रा इंटेस लेजर और अंतर्राष्र्ट्रीय समिती के सचिव के रुप मे कार्य किया है | वह इंटरनेशनल कमेटी फॉर इंटेस लेजर साइंस फोटोनिक्सा इलेक्ट्रॉनिक और परमाणू टकराव पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के कार्यकारी समिती के सदस्या रहे है |
पूरस्कार और सम्मान :
1) उनहें 1991 मे सर्वोच्चा भारतीय विज्ञान पुरस्कारों मे से एक शांति स्वरुप भटनागर पूरस्कार से सम्मनित किया |
2) वह प्रख्यात मास स्पेक्ट्रोमेट्रिस्टा पूरस्कार के प्राप्ताकर्ता भी है |
3) उनके व्दारा दिए गए पूरस्कारों मे एमएनसाहा मेमोरियल लेक्चर्स टी के राय दस्तीदार मेमोरियल लेक्चर एलके अनंतकृत मेमोरियल लेक्चर और आर एस कृष्णन मेमोरियल लेक्चर शामिल है |
4) 1992 मे माथूर को भारतीय विज्ञान अकादमी व्दारा एक साथी के रुप मे चुना गया था |
5) वर्ल्ड एकेडमी ऑफ सांइसेज ने उनहें 2013 मे एक साथी के रुप मे चुना था |
6) उनहेंने ऑक्साफोर्ड यूनिवर्सिटी मे रॉयल सोसायटी गेस्टा फैलोशिप कॉनवेल्थ यूनिवर्सिटी के एसेासिएशन के फुल्टन फेलोशीप आयेाजित किए है |
पूस्तके :
1) आयन इम्पेक्टा फेनोमेना के भौतिकी 2012|
2) परमाणू, आणविक और ऑप्टिकल भौतिकी प्रगती और अवसर 2009|
3) भौतिकी कि दुनिया मे भारत तब और अब 2009|
4) आरोपित आणओ को गुणा करे 1993|
5) तीव्र लेजर क्षेत्रों मे आणविक पेंउूल्यर पूरस्कार 1996