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नाम : दीपक कुमार
जन्म दि : 1 अ्रपैल 1946
टिकाण :नई दिल्ली भारत
व्यावसाय : भैातिक विज्ञानी
मृत्यू : 26 जनवरी 2016 आयू 69 वर्षे
प्रारंभिक जीवनी :
दिपक कूमार का जन्म 1 अप्रैल 1946 को नई दिल्ली प्रेवश लेने से पहले स्थानीय स्कूलों मे अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी कि थी | जहाँ से उन्होंने 1965 मे सम्मान के साथ विज्ञान मे स्त्रातक किया था | उन्हेांने दिल्ली विश्वाविघ्यालय मे अपनी पढाई जारी रखी थी |
1967 मे भौतिक विज्ञान मे स्त्रातकोत्तार उपाधि प्रापता करने के बाद 1972 मे पीएचडी कि उपाधि हासिल करने के लिए वे यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया मे एबी हैरिस कि देखरेख मे डॉक्टरेट कि पढाई करने के लिए अमेरिका चले गए थे | इसके बाद उन्हेांने अपनी पढाई शुरु कि |
कुमार ने जीवन भर जीएनयू के साथ अपना जुडाव बनाए रखा था | और 25 जनवरी 2016 को विशवाविघ्यालयसे लौटने के दौरान वह बीमार पड गए थे | अगले दिन उनका निधन 69 वर्षे कि आयू मे एक स्थानय अस्पताल मे बेटे शरद और बेटी जयोती के हाथों से हुआ
कार्य :
दिपक कुमार एक भारतीय संघनित भैातिक विज्ञानी है | और जवाहरलाल नेहरु विश्वाविघ्यालय के शारीरीक विज्ञान के स्कूल मे प्रोफेसर थे | व्कांटम यांत्रिकि और संघनित पदार्थ भौतिकी के अन्या क्षेत्रों पर अपने शोध के लिए जाना जाता है | उन्होंने रुडकि विश्वाविघ्यालय मे भौतिकी विभाग के संकाय सदस्या के रुप मे कार्य कियाथा |
उन्हेंाने 16 वर्षो तक संस्था कि सेवा कि और जब जवाहरलाल नेहरु विश्वाविघ्यालय ने एक स्कूल आफ फिजिकल साइंसेज कि स्थापना कि थी | वह 1988 मे स्कूल मे एक प्रोफेसर का पद संभालने के लिए अपने मूल स्थान पर लौट आए थे |
संघटित पदार्थ भौतिकी मे कुमार के शोध का मुख्या फोकस अव्यावस्थित चुंबकीय प्रणालियों से संबंधित सिध्दांत था | आईआईटी रुडकी मे उन्हेांने कई वैज्ञानिकों जैसे मुस्तानसिर बरमा और एस शेलॉय के साा मिलकर सुपरमैरामैग्नेटिक पाटीकल्सा, मैग्नेटिक अग्निसोट्रॉपी और डिसॉर्डर अल्ट्रामेटिक मॉडल का अध्यायन किया था |
आनिसोट्रॉपिक मॅग्नेट के पेरोलेशन थ्रेशोल्ड पर उनके काम नेिस्पिन समूहो की भग्ना प्रकृति कि समझा को चौडा किया था | वे पहले भारतीय वैज्ञानिकों मे से एक थे | जिसके लिए उनहेांने सुबीर कुमार ,सरकार संजय पुरी, रुपमंजरी घोष, राममूर्ति रजारमन और एके सहित कई भौतिकविदों के साथ सहयोग किया था |
उनके अध्यायन को कई लेखो के माध्याम से प्रलेखित किया गया है | और भारतीय विज्ञान अकादमी के ऑनलाईन लेख भाउार ने उनमे से 98 को सूचीबध्दा किया है | इसके अलावा उन्हेांने दो पुस्तकों का सहसंपादन किया था |
पुरस्कार और सम्मान :
1) अलेक्जैंडर बॉन हम्बोल्ट फेलो के रुप मे दिपक कूमार को 1986 मे अब्दूल सलाम इंटरनेशनल सेंटर फॉर थियोरेटिकल फिजिक्सा के वरिष्ठा सहयोगी के रुप मे चुना गया था |
2) भारती विज्ञान अकादमी ने उनहें 1987 मे एक साथी के रुप मे चुना था |
3) उनहे 1988 मे सर्वोच्चा भारतीय विज्ञान पूरस्कारों मे से एक शांति स्वरुप भटनागर पूरस्कार मिला था |
4) वे एक सदस्या के रुप मे इडियन फिजिक्सा एसोसिएशान और मटेरियल रिसर्च सोसायटी ऑफ इंडिया से भी जुडे थे |
पूस्तके :
1) विकार वाले लेस पदार्थो का भौतिकी 1982|
2) ठोस और तरल पदार्थ के सांख्यिकिय भौतिकी मे प्रगती 1990|
3) क्षेत्र सिध्दांत संघनित पदार्थ भौतिकी मे 2002 |
4) कूलम्ब ग्लास मे सहसंबंधित होपिंग 2003|
5) वृध्दिशील मिश्रण मे डोमेन वृध्दि के लिए एजिंग आर सतुंलन मे उतार चढाव 2014