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चैतन्यामय गांगूली की जीवनी - Biography of Chaitanyamaya Ganguli in hindi jivani

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नाम : चैतन्यामय गांगूली

जन्म तिथी : 31 दिसंबर 1946 आयू 73

ठिकाण : शिबपूर, पश्चिम बंगाल

व्यावसाय : परमाणू वैज्ञानिक


प्रारंभिक जीवनी :


        चैतन्यामय गांगूली का जन्म 31 दिसंबर 1946 को भारतीय राजया पश्चिम बंगाल के शिवपूर मे हुआ था | उन्होंने कलकत्ता विश्वाविदयालय के इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ इंजिनियरींग साइंस एंड टेक्नोलॉजी, शिवपूर से धातुकर्म इंजिनियरींग बीई मे स्त्रातक किया था | और भाभा परमाणू अनुसंधान केंद्र बीएआरसी टॉम्बे मे उच्च प्रशिक्षण प्रापता किया था |


        उनका करयिर 1969 मे बीएआरसी के साथ उनके रेडियोमेट्रिकल्चर डिवीजन मे शुरु हुआ था | जहां उन्हेांने 1995 तक पेशेवर पदों पर और BARC प्रशिक्षण स्कूल मे एक संकाय सदस्या के रुप मे काम किया था | 1980 मे कलक्तत विश्वाविदयालय से डॉक्टरेट कि उपाधि पीएचडी प्राप्ता कि थी |


कार्य :


        चैतन्यामय गांगूली एक भारतीय परमाणू वैज्ञानिक है | परमाणू उर्जा विज्ञान के क्षैत्र मे कई नवाचारों का श्रेय अंतराष्ष्ट्रीय परमाणू ऊर्जा एजेंसी के परमाणू इंधन चक्रऔर सामग्री अनुभाग के पूर्व प्रमूख है | जर्मनी मे डॉक्टर कि रसिर्च के बाद हम्बोल्ट फेलो के रुप मे पदग्रहन किया था | गांगुली जर्मनी से लौटने के बाद मे BARC के रेडिओमेट्रिकल्चार डिवीजन के प्रमूख बनाए गए थे |


        जो द उन्हेांने 1995 मे सेंट्रल ग्लास एंड सिरेमिक रिसर्च इंस्टीटयूट कोलकत्ता मे अपने कदम रखने तक के लिए रखा था | 1998 मे गांगुली को परमाणू ऊर्जा विभाग डीएई के परमाणू इंधन परिसर एनएफई का अध्याक्ष और मुख्या कार्यकारी बनाया गया था | और वे 2004 तक इस पद पर रहे है | अंतर्राष्ट्रीय परमाणू उर्जा एजेंन्सी अनुभाग के प्रमूख के रुप मे हैदराबाद मे अपनी भारत कि सहायक कंपनी खोली तो उन्हे राष्ट्रपती के रुप मे नियुक्त किया गया था |


        केंद्रीय ग्लास और सिरेमिक रिसर्च इंस्टीटयूट मे अपने कार्यकाल के दौरान गांगूली ने निकिरण से खिडकियो को अलने के लिए एक उच्चा धनत्वा लेग्लास विकसित करने कि सूचना द‍ि है | उन्होंने इसके विकास मे भी योगदान दिया है |


1)लेजर ग्लास और शून्या विस्तार ग्लास से वेरिएंट जो रक्षा और एयरोस्पेस उघोगो मे उपयोग मे है 

2)पानी ठंडा रिएक्टरों के लिए थोरियम आधारित मिश्रित ऑक्साइड इंधन

3)दूरस्थ रुप से संचलित सोल जेल प्रकिया का उपयोग ऑक्साइड निर्माण मे किया जाता है |

4)कार्बाइड और नाइट्राइड ईंधन छर्रो |


        जो एमटेक और पीएचडी के मान्याता प्रापता मार्गदर्शक है | उन्हेांने विकासशील देशो को प्रौघोगिकि हस्तांतरण के लिए तकनीकि सहयोग कार्यक्रम मे भी भाग लिया है |


पूरस्कार और सम्मान :


1) चैतन्यामय गांगुली, केंद्रीय ग्लास और सिरेमिक रिसर्च इंस्टीटयूट के एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक है |

2) भारतीय विज्ञान अकादमी FASC के एक निर्वाचित फेलो है|

3) वह इंडीयन इंस्टीटयूट ऑफ मेटल्सा इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ सेरामिक्सा और अलेझेंडर वॉन हमबगेल् फाउंडेशन जर्मनी के फेलो भी है |

4) उनहें VASVIK इंडस्ट्रीयल रिसर्च अवार्ड से सम्मानित |

5) इंडियन न्यूक्लियर सोसाइटी अवार्ड से सम्मानित |

6) ITM कमानी गोल्ड मेडल से सम्मानित|

7) ITM बिनानी गोल्ड मेडल मिला था |

8) डीएन अग्रवाल पुरस्कार से सम्मानित|

9) इंडियन सिरेमिक सोसाइटी के मालवीय पूरस्कार से सम्मानित|

10) वह एमआरएसआई पदक के प्राप्ता कर्ता है |

11) भारतीय वेल्डींग संस्थान के केसीपी पूरस्कार के प्रापताकर्ता भी है |

12) उनहे भारत सरकार ने 2002 मे पदमश्री के नागरिक सम्मान के साथ राष्ट्रीय मेटालर्जिस्टा दिवस पूरस्कार से सम्मानित किया है |


पूस्तके :


1) न्यूक्लियर फयूल फैब्रिकेशन|

2) एडवांस्ड सेरामीक्सा |