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नाम : सुभाष काक
जन्म दि : 26 मार्च 1947
ठिकाण : श्रीनगर, जम्मू और काश्मीर, भारत
भाई : अविनाश काक
व्यावसाय : कांप्यूटर वैज्ञानिक और हिंदूत्वावादी ऐतिहासिक संशोधनवादी
प्रारंभिक जीवन :
सुभाष काक का जन्म 26 मार्च 1947 को हुवा है | उनका जन्म श्रीनगर जम्मू और काश्मीर, भारत मे हुवा है | उनके पिता राम नाथ काक जो कीएक सरकारी पशु चिकित्साक थे | और उनके भाई अविनाश काक जो कंप्यूटर वैज्ञानिक है | और बहन जयश्री ओडिन जो साहित्यीक सिध्दांतकार है | सुभाष काक ने इंजिनियरिंग कॉलेज श्रीनगर मे अपनी बी ई पूरी कि है |
1975 मे भारतीय प्रौघोगिकी संस्थान दिल्ली से पीएचडी पूरी कि है | 1975 से 1976 के दोरान उन्हेांने इम्पीरियल कॉलेज लंदन मे एक विजिटींग फैकल्टी थे | और बेल लेबोरेटरीज मरे हिल मे एक अतिथी शोधकर्ता थे| सुभाष का का कहना है की भारत को स्टे सीजने से महत्वापूर्ण सेाच की और बढने की जरुरत है|
कार्य :
सुभाष काक 1977 मेटाटा इंस्टीटयूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च, बॉम्बे मे एक शोधकर्ता थे | 1979 मे वो लुडसियाना स्टेट युनिवर्सिटी बैठन रुज मे शामिल हो गए | जहा वो डोनाल्डा सी आर एलेज टी डलैन प्रतिष्ठित इलेक्टीकल और कंप्यूटर इंजिनियरिंग के प्रोफेसर थे |
2007 मे काक आकलाहोम स्टैट युनिवर्सिटी स्टिलवॉटर मे कंप्यूटर विज्ञान विभाग मे शामिल हो गए थे | काक ने विज्ञान के इतिहास, विज्ञान के दर्शन और गणित के इतिहास पर प्रकाशित किया है | उनहें फ्रीकासो और स्टैनली व्हिपनर व्दारा संपादित जर्नल न्यूरोव्कांटोलॉजी मे क्वांटम सिखने के अग्रदूतों मे से एक के रुप मे चित्रित किया गया था |
सुभाष काकने एक कुश थ्री लेयर फीड फॉरवर्ड न्यूरल नेटवर्क अर्किटेक्चार का प्रस्ताव किया था | और इसे प्रशिक्षण के लिए चार कोने वर्गीकरण एल्गोरिदम विकसित किए गए थे | स्केलेबिलिटी के मुधों की आलोचना करने के बावजुद इसने इलेक्ट्रॉनिक हार्डबेयर समुदाय के भीतर ध्यान आकर्षित किया था |
काक ने तर्क दिया है कि कृतिम बुध्दिमत्ता की सीमाएँ है | और यह जैविक समकक्ष की बराबरी नही कर सकता है | काक ओल्काहोमा स्टैट युनिवसिटी सिटलवाटर मे कंप्यूटर विज्ञान विभाग के रीजेट प्रोफेसर और जवाहरलाल नेहरु विश्वाविदयालय मे इंजिनियरिंग के प्रोफेसर के मानद विजिटींग प्रोफेसर है |
उपलब्धी :
1) 2019 मे भारत सरकार ने उनहे पदमश्री भारत का चौथा नागरिक पूरस्कार प्रदान किया है |