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नाम : रबिंद्रा मोहापात्रा
जन्म तिथी : 1 सितंबर 1944
ठिकाण : मयूरभंज, उडिसा भारत
व्यावसाय : भौतिक विज्ञानी
प्रारंभिक जीवनी :
रबिंद्रा मोहापात्रा एक भारतीय अमेरिकि सैध्दांतिक भौतिक विज्ञानी है | उनहे न्यूट्रिनो भौतिकी मे सीसाव तंत्र पर उनके काम के लिए जाना जाता है | रब्रीन्द्र का जन्म उडिसा के मुयरभंज के छोटे से गांव मुसागडिया मे हुआ था | सन 1964 मे उन्हेांने उत्कल विश्वाविघ्यालय, भुवनेश्वर से स्त्रातक कि उपाधि प्राप्ता कि है |
सन 1966 मे दिल्ली विश्वाविघ्यालय से रब्रीन्द्रा ने मास्टार उपाधि प्राप्ता कि है | सन 1969 मे उन्होंने रॉबर्ट मार्शल के तहत रोचेस्टार विश्वाविघ्यालय से पीएचडी कि उपाधि प्रापता कि है | इसके बाद रब्रीन्द्र स्टोनी ब्रूक विश्वाविघ्यालय और मैरीलैंड विश्वाविघ्यालय मे पोस्टा डॉक्टर रहे है |
कार्य :
सन 1974 मे रबिंद्रा बंजी सकिता के तहत सिटी कॉलेज ऑफ क्यूनी मे सहायक प्रोफेसर के रुप मे काम करते थे | उन्हेांने सन 1975 मे एसोसिएट प्रोफेसर के रप मे काम किया है | सन 1980 से 1981 मे रब्रिंन्द्र ने विजिटिंग प्रोफेसर के रुप मे मैक्सा प्लैंक इंस्टीटयूट फॉर फिजिक्सा मे काम किया है |
सन 1983 से वे मैरीलैंड विश्वाविघ्यालय मे प्रोफेसर के रुप मे कार्यरित है | प्रो रबिंद्रा ग्रैंड युनिफाइड थ्योरी जीयूटीउएस पर काम कर रहे है | वह प्राथमिक कणों और नयूट्रीनो भौतिकी के सिध्दांतो का एकीकृत करते है | सन 1970 मे उन्हेांने जी सेनजानोविक के साथ बाएं दाएं सममित रुप से एकीकृत सिध्दांतो को विकसीत करने का कार्य किया है |
उन्हेांने पलाशपाल के साथ भौतिकी और खगोल भौतिकी मे बडे पैमाने पर न्यूट्रिनो पर काम किया है | रबिंद्रा सन 1976 1981 औ 1985 मे सीईआरएन राष्ट्रीय त्वरक प्रयोगशला लॉस एलामोस नेशनल लेबोरेटरी और ब्रूकवेन नेशनल लेबोरेटरी मे विजिटिंग प्रोफेसर के रुप मे कार्यरीत रहे है | सन 2005 से 2007 तक वह टीयू मून्चेन मे एक विजिटींग प्रोफेसर थै |
उपलब्धि :
1) रबिंद्रा सन 1980 से 1981 मे एक अलेक्जेंडर वॉन हम्बोल्ट फेलो थे |
2) 2005 मे रबिंद्रा को हम्बोल्ट पुरस्कार मिला है |
3) सन 2009 मे रब्रीन्द्र को उत्तर उडीसा विशविघ्यालय से डॉक्टरेट कि मानद उपाधि मिली है |
4) सन 1987 से प्रो रबिंद्रा भारतीय विज्ञान अकादमी के सदस्या रहे है |
ग्रंथ/पूस्तक :
1) 1991 मे प्रकाशित् : मसिव न्यूट्रीनस इन फिजीक्सा एंड एस्ट्रोफिजिक्सा|
2) 1986: युनिफीकेशन एंड सूपरसिमेट्री|
3) रबीन्द्रा और टी हाँग टी ही व्दारा लिखिती पुस्तक : मॅथमॅटिकल फाउंडेशन