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नाम : पी. टी. नरसिम्हान
जन्म दि : 28 जुलाई 1928
ठिकाण : कूड्उालोर, तामीलनाडू , भारत
पत्नी : लीना
व्यावसाय : रसायनतज्ञ
प्रारंभिक जीवनी :
पी. टी. नरसिंम्हान का पूरा नाम पल्लीकरनई थिरुमलाई नरसिम्हान है | पी. टी. एन या जिम के नाम से भी उनहें जाना जाता है | वह भारत मे कम्प्यूटेशनल रसायन विज्ञान के अग्रदूतों मे से एक थे | पी. टी. नरसिम्हान भारतीय प्रौघोगिकी संस्थान, कानपूर मे प्रोफेसर थे | पीटी नरसिम्हान का जन्म 28 जुलाई 1928 को भारत मे तामिलनाडू राजया के कुडालोर शहर मे हुआ था |उन्होंने मद्रास क्रिश्चीयन कॉलेज से बीएससी मे स्त्रातक कि उपाधि प्राप्ता कि थी| मद्रास क्रिश्चीयन कॉलेज से ही उन्हेांने मास्टार डिग्री प्रापता कि थी |
सन 1955 मे उन्हेांने भारतीय विज्ञान ससान से भौतिक रसायन विज्ञान मे पीएचडी कि उपाधि प्राप्ता कि थी | उन्हें पोस्टा डॉक्टरेल के लिए संरक्षक आरएस कृष्णान का मार्गदर्शन मिला | उन्हेांने 1957 से 1959 मे मिशिगन स्टैट यूनिवर्सिटी मैक्सा टी से पोस्टा डॉक्टरेल रिसर्च किया था | इसके आलावा उन्हें कार्णिक संगीत मे रुची थी नरसिंहान ने अमेरिका और भारत मे कर्णिक संगीत का विभिन्ना चरणो मे प्रदर्शन किया था | नरसिंहान का विवाह लिना से हुआ था उन्हें दो बेटीयां और एक बेटा था |
कार्य :
नरसिंम्हान ने सन 1962 मे भारतीय प्रौघोगिकी संस्थान, कानपूर मे सहायक प्राघ्यापक के रुप मे कार्य किया है | वहॉ पर वे सन 1965 मे प्राघ्यापक बने | नरसिंम्हान संस्थान मे सन 1988 तक अपनी सेवानिवृत्ति तक कार्यरित रहे थे | उसके बाद उन्होंने इंटिगटन मेडिकल रिसर्च इंस्टीटयूट मे और कैलिफोर्निया इंस्टीटयूट ऑफ टेक्नोलॉजी के बैकमेन इंसटीटयूट मे अपना शोध जारी रखा था |
नरसिंम्हान ने मार्टिन कार्प्लस कि प्रयोगशला मे परमाणू स्पिन युग्मन स्थिरांक के सिध्दांत पर काम किया था | उनके योगदान ने भारत मे एक्सा बैंड पर गतिशिल परमाणू घ्रूवीकरण के विकास मे मदद कि है | जिससे दोनों इंस्ट्रमेटेशन और रासायनिक अनुप्रयोगों को कवर किया गया था | नरसिंम्हान ने कंम्प्यूटेटशनल रसायन विज्ञान के क्षेत्र मे भी अपना महत्वापूर्ण योगदान दिया है | उनहेांने और उनके सहयोगीयों ने स्वदेश निर्मित सूपर रिजनरेटिव ऑसिलेटर डिरेक्टरों को बंद कर दिया और पल्सा न्यूक्लियर क्वाडूपोल अनुवाद एनक्यूआर डबल रेजोनिंस स्टिाम को विकसीत करने का कार्य किया था |
नरसिंम्हान ने जैविक अनूसंघान के लिए इमेजिंग उपकरण के रुप मे एक चुंबकीय अनूवाद मइक्रोस्कोपी को विकसित करने के लिए भी काम किया था | नरसिम्हान ने रासायनिक अनूसंधान ने उत्कृष्टता केंद्र के रुप मे विकसित करने के लिए रसायन विज्ञान विभाग के प्रमूख के रुप मे सहायकता कि थी | वह एसोसिएश्ंन ऑफ मैग्नेटिक रेजोनेस स्पेक्ट्रोस्कोपिस्टा ऑफ इंडिया के संस्थापको मे से एक थे | उनहेांने वहां पर सचिव के रुप मे भी कार्य किया है | वह अपनी काउंसील के एक सदस्या के रुप मे इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ मैग्नेटिक रेजोनेंस से जुडे थै |
उपलब्धि :
पूरस्कार/सम्मान :
1) सन 1970 म उन्हें उनके योगदान के लिए शाती स्वरुप भटनागर पूरस्कार से सम्मानित किया गया था |
2) सन 1980 मे नरसिम्हान को यूजीसी सी वी रमन पूरस्कार प्रापता हुआ था |
3) सन 1971 मे नरसिंम्हान भारतीय विज्ञान अकादमी के, नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज और सन 1972 मे भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी और सन 2013 मे भारती प्रौघोगिकी संस्थान, कानपूर के निवाचित साथी रहे है |
4) सन 1988 मे उनहेांने कानपूर मे आयेजित न्यूक्लियर क्वाड्रपोल रेजोनेंस पर आयएक्सा इंटरनेशनल सिम्पोजियम कि राष्ट्रीय सलाहकार समिती कि अध्याक्षता की थी |
नरसिंम्हान का 3 मई 2013 को अमेरिका मे कैलिफोर्निया के सनीवेल मे निधन हुआ था |