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कृष्णास्वामी कस्तूरीरंगन जीवनी - Biography of Krishnaswamy Kasturirangan in Hindi Jivani

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 डॉ कृष्णस्वामी कस्तूरीरंगन (जन्म 20 अक्टूबर, 1 9 40, एर्नाकुलम, केरल, भारत में) (मलयालम) एक अंतरिक्ष वैज्ञानिक है जो भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का नेतृत्व 9 वर्ष से अधिक तक 2003 तक कर रहा था और अब एम.पी. (राज्य सभा में नामित) वह अप्रैल 2004 से बैंगलोर के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज, के निदेशक भी हैं। वे भारत सरकार से तीन नागरिक पुरस्कार, पद्म श्री (1 9 82), पद्म भूषण (1 99 2) और पद्म विभूषण (1 99 2) 2000)।


डॉ. कृष्णस्वामी कस्तूरीरंगन संप्रति योजना आयोग के सदस्य हैं। डॉ. कस्तूरीरंगन ने 27 अगस्त, 2003 में पद छोड़ने से पहले भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के अध्यक्ष और भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग के सचिव के रूप में 9 वर्षों से अधिक समय तक भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का शानदार तरीक़े से संचालन किया।


वे प्रथम इसरो उपग्रह केंद्र के निदेशक थे, जहाँ उन्होंने नई पीढ़ी के अंतरिक्ष यान, भारतीय राष्ट्रीय उपग्रह (इन्सैट-2) तथा भारतीय सुदूर संवेदन उपग्रह (आईआरएस-1ए व 1बी) और साथ ही, वैज्ञानिक उपग्रहों से संबंधित गतिविधियों का सर्वेक्षण किया।


वे भारत के प्रथम दो प्रायोगिक भू-प्रेक्षण उपग्रह, भास्कर- I व II के परियोजना निदेशक भी थे और बाद में प्रथम संक्रियात्मक भारतीय सुदूर संवेदन उपग्रह, आईआरएस-1ए के समग्र निर्देशन की जिम्मेदारी सँभाली।


डॉ. कस्तूरीरंगन ने बंबई विश्वविद्यालय से ऑनर्स सहित विज्ञान स्नातक की पदवी और भौतिक विज्ञान में स्नातकोत्तर पदवी तथा भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला, अहमदाबाद में काम करते हुए 1971 में प्रायोगिक उच्च ऊर्जा खगोल-विज्ञान में डॉक्टरेट डिग्री प्राप्त की।


इसरो के अध्यक्ष के रूप में उनके नेतृत्व में अंतरिक्ष कार्यक्रमों ने कई प्रमुख उपलब्धियाँ हासिल कीं जिनमें भारत के प्रतिष्ठित प्रमोचन यान, ध्रुवीय उपग्रह प्रमोचन यान (पीएसएलवी) और अभी हाल ही में, अत्यधिक महत्वपूर्ण भू-तुल्यकाली उपग्रह प्रमोचन यान (जीएसएलवी) का प्रथम सफल उड़ान परीक्षण शामिल हैं।


इसके अतिरिक्त, उन्होंने समुद्री प्रेक्षण उपग्रह आईआरएस-पी3/पी4 के प्रमोचनों के साथ-साथ, विश्व के सर्वोत्तम नागरिक उपग्रह, आईआरएस-1सी और 1डी का अभिकल्पन, विकास और प्रमोचन, इन्सैट उपग्रहों की दूसरी पीढ़ी की प्राप्ति और तीसरी पीढ़ी के प्रवर्तन का देख-रेख कार्य भी सँभाला। इन प्रयासों ने भारत को अंतरिक्ष कार्यक्रम वाले मुट्ठी भर प्रमुख छह देशों के बीच पूर्व-प्रख्यात अंतरिक्ष-अग्रगामी राष्ट्र के रूप में स्थापित किया।


खगोलशास्त्री के रूप में डॉ.कस्तूरीरंगन की दिलचस्पियों में शामिल हैं उच्च ऊर्जा एक्स-किरण और गामा किरण खगोल-विज्ञान और साथ ही, प्रकाशिक खगोल-विज्ञान में अनुसंधान। उन्होंने ब्रह्मांडीय एक्स-किरण स्रोतों, खगोलीय गामा-किरण और निचले वायुमंडल में ब्रह्मांडीय एक्स-किरणों के प्रभाव से संबंधित अध्ययनों में व्यापक और महत्वपूर्ण योगदान दिया है।


शिक्षा


कस्तुरिरंगन ने मुंबई में स्थित रामनारायण रूइया कॉलेज, माटुंगा से ऑनर्स के साथ विज्ञान में स्नातक किया, और मुंबई विश्वविद्यालय से भौतिकी में विज्ञान की डिग्री प्राप्त करने के लिए मास्टर ऑफ साइंस प्राप्त किया। उन्होंने भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला, अहमदाबाद में काम कर रहे, 1 9 71 में प्रयोगात्मक उच्च ऊर्जा खगोल विज्ञान में अपनी डॉक्टरेट डिग्री प्राप्त की। उन्होंने खगोल विज्ञान, अंतरिक्ष विज्ञान और अनुप्रयोगों के क्षेत्र में 244 से अधिक पत्र प्रकाशित किए हैं।


कैरियर:


 वह 2003 से 200 9 तक राज्यसभा के एक पूर्व सदस्य बन गए हैं और आजकल, वह अब भारत के अब नियोजित योजना आयोग के पूर्व सदस्य के रूप में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने अप्रैल 2004 से लेकर 200 9 के बीच, उन्नत अध्ययन संस्थान, बैंगलोर के एक निदेशक के रूप में काम किया है।


महत्वपूर्ण योगदान


डॉ॰ कस्तूरीरंगन ने इसरो एवं अंतरिक्ष आयोग के अध्यक्ष और अंतरिक्ष विभाग में भारत सरकार के सचिव के रूप में 9 साल तक भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का निर्देशन किया। इससे पहले जब वे इसरो के उपग्रह केंद्र के निदेशक थे, तब उनकी देखरेख में भारतीय राष्ट्रीय उपग्रह (इनसैट -2), भारतीय दूरसंवेदी उपग्रह (आईआरएस -1 ए और 1 बी) तथा अन्य कई वैज्ञानिक उपग्रह विकसित किये गए। वह भारत के पहले प्रयोगात्मक पृथ्वी अवलोकन उपग्रहों, (भास्कर एकम और द्वितीय) के लिए परियोजना निदेशक थे।


        उनके नेतृत्व में भारत के प्रतिष्ठित प्रक्षेपण वाहन - ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान(PSLV) और भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान(GSLV) का सफल प्रक्षेपण एवं संचालन हुआ। उनकी अगुआई में भारत ने चन्द्रयान-१ का सफल प्रक्षेपण किया, जिसे मील के पत्थर के रूप में देखा जाता है। उनके इन प्रयासों ने प्रमुख तौर पर अंतरिक्ष कार्यक्रम चलाने वाले गिने-चुने देशों की सूची में भारत को भी डाल दिया है


सम्मान और पुरस्कार


डॉ. कस्तूरीरंगन पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्मविभूषण से सम्मानित हैं। उन्होंने खगोल-विज्ञान, अंतरिक्ष विज्ञान, अंतरिक्ष उपयोग के क्षेत्रों में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में 200 से अधिक आलेख प्रकाशित किए हैं और 6 पुस्तकों को संपादित किया है।


इंजीनियरिंग में शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार


वांतरिक्ष में श्री हरि ओम आश्रम डॉ. विक्रम साराभाई प्रेरिट पुरस्कार


खगोल-विज्ञान में एम.पी.बिरला स्मारक पुरस्कार


अनुप्रयुक्त विज्ञान में श्री एम.एम.छुगानी स्मारक पुरस्कार


विज्ञान प्रौद्योगिकी में एच.के.फ़िरोदिया पुरस्कार


विश्वभारती, शांतिनिकेतन द्वारा रतींद्र पुरस्कार


अंतरिक्ष के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए डॉ.एम.एन साहा जन्म शताब्दी मेडल।


राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय सम्मान


 


डॉ. कस्तूरीरंगन ने ब्रॉक मेडल ऑफ इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ फोटोग्रामेट्री एंड रिमोट सोन्सिंग, (2004)


एलन डी इमिल मेमोरियल अवार्ड ऑफ द इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉटिकल फेडरेशन (2004)


इंटरनेशनल एकेडमी ऑफ एस्ट्रोनोटिक्स (आईएए), फ्रांस द्वारा थिओडोर वॉन कारमन अवार्ड


इंजीनियरिंग में शान्ति स्वरूप भटनागर अवार्ड एस्ट्रोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया का आर्यभट्‌ट अवार्ड 2003


एशियापेसिफिक सेटेलाइट कम्युनिकेशन्स काउंसिल, सिंगापुर का लाइफ टाइम एचीवमेंट अवार्ड


भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान एकेडमी (2000) द्वारा आर्यभट्‌ट मेडल


भारतीय विज्ञान कांग्रेस द्वारा आशुतोष मुखर्जी मेमोरियल अवार्ड


रुइया कालेज एलुमनी ऐसोसिएशन, 2007 द्वारा अवार्ड ऑफ ज्वेल ऑफ रूइया


महाराणा मेवाड़ चैरीटेबल फाउंडेशन, उदयपुर, 2008 द्वारा महाराणा उदय सिंह अवार्ड 2007-08


राजयोगिन्‌‌द्र अवार्ड, महाराजा ऑफ मैसूर, मैसूर, 2008


इंडियन साइंस कांग्रेस, शिलांग, 2009


महामहिम पझहासी राजा चैरीटेबल ट्रस्ट, केरल (2005) द्वारा शास्त्र भूषण अवार्ड आदि सहित कई पुरस्कार प्राप्त किए हैं।