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नाम : सी. वी. विश्वेश्वर
जन्म तिथी : 6 मार्च 1938
ठिकाण : बेंगलुरु
व्यावसाय : भौतिक विज्ञानी
पत्नी : सरस्वती विश्वेश्वार
मृत्यू : 16 जनवरी 2017
प्रारंभिक जीवन :
सी. वी. विश्वेश्वर का जन्म 6 मार्च 1938 केा बेंगलूरु मे हुआ था | उन्होंने कोलंबिया विश्वाविदयालय से अपनी एएम कि डिग्री हासिल कि थी | मिसनर के तहत श्वार्जचाइल्ड ब्लैंक होल कि स्थिरता पर काम करते हुए, उन्होंने मैरीलैंड विश्वाविदयालय से पीएचडी कि डिग्री हासिल कि थी | बाद मे उन्होंने न्यूयॉर्क विश्वाविदयालय और पिटसबर्ग विश्वाविदयालय के संकायों मे सेवा कि थी |
कार्य :
सी. वी. विश्वेश्वार एक भारतीय वैज्ञानिक और ब्लैक होल भौतिक विज्ञानी थे | साइंस्टीन कि सामान्या सापेक्षता मे विशेषज्ञता, उन्होंने ब्लैक होल के सिध्दांत पर बडे पैमाने पर काम किया है | और अनुसंधान के इस क्षेत्र मे अपनी शुरुआत से ही प्रमूख योगदान दिया था | उन्हें लोकप्रिय रुप से भारत के ब्लैक होल मैन के रुप मे जाना जाता है |
भारत के बेंगलुरु के लडकी के खिलौने के लिए प्रसिध्द अपने गूहनगर चन्नपटना मे लौटने के बाद, वह रमन रिसर्च इंस्टीटयूट और इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्सा मे एक वरिष्ठ प्रोफेसर थे | विश्वेश्वर ने कई विश्वाविदयालयों मे विजीटिंग प्रोफेसर के पद पर भी काम किया है | जिसमे यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी ऑफ मेरीलैंड बोस्टन यूनिवर्सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन और यूनिवर्सिडेल डेल पेस वास्को शामिल है |
विश्वेश्वर सबसे पहले ब्लैंक होल कि संरचना का विश्लेषण करने मे से एक थी | जो स्पेसटाइम समरुपता को रोजगार देती थी | जिससे एर्गोस्फीयर के अस्तित्वा का प्रदर्शन होता था | इसके अलावा उन्होंने ब्लैक होल के विलक्षण मोड कि खोज कि थी |
ब्लैक होल वाइब्रेशन के ये तरीके गुरुत्वाकर्षण तरंग डिटेक्टरों का उपयोग करते हुए अवलोकन के मुख्या लक्ष्यों मे से एक है | विश्वेश्वर ने सामान्या सापेक्षता के अन्या क्षेत्रों मे भी महत्वापूर्ण योगदान दिया है , जैसे कि आइंस्टीन के क्षैत्र समीकरणेां गुरुत्वाकर्षण पतन, कॉम्पैक्ट तारकिय वस्तुओं, जडत्वीय बलों और स्पेसटाइम गडबडी के स्टीक समाधान |
बंगलौर मे तारांमंडल के संस्थापक निदेशक के रुप मे कार्य किया था | उन्होंने कई तारामंडल कार्यक्रमों कि पटकथा लिखि और उन्हें निर्देशित किया था | ये सरल और आकर्षक तरीके से कठीन अवधारणाओं को प्रस्तूत करने के कारण अत्याधिक लोकप्रिय शाबित हुए है | विश्वेश्वर ने दो लधू विज्ञान फिल्मेां का भी निर्माण किया है |
शिक्षा के एक भाग के रुप मे अनुसंधान को बडावा देने के लिए उन्होंने रिसर्च एजुकेशन एडवांसमेंट प्रोग्राम शुरु किया था | इसके भाग के रुप मे स्त्रातक छात्रों कोभौतिकी या जीव विज्ञान के मूल सिध्दांतो मे क्षैत्र मे वैज्ञानिकों का अभ्यास करके पढाया जाता है | और चयनित छात्र भारतीय विज्ञान संस्थान, रमन शेाध संस्थान भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान जैसे संस्थानों मे अनुसंधान परियोजनाओं मे शामिल होते है |
पूस्तकें :
1) आइंस्टीन कि पहेली या ब्लैक होल्सा इन माई बबल बाथ|
2) ब्लैक होल्सा, ग्रेविटेशनल रेडिएशन एंड द यूनिवर्स एसेज इन ऑनर ऑफ सी वी विश्वेश्वार 1999|