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वैज्ञानिक

अरुण निगवेकर की जीवनी - Biography of Arun Nigavekar in hindi jivani

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नाम : अरुण निगवेकर

जन्म दि : 14 मार्च 1942

व्यवसाय : भौतिक विज्ञानी


प्रारंभिक जीवनी :


        अरुण निगवेकर का जन्म 14 मार्च 1942 को हुआ था | उन्होने पुणे और उप्साला मे स्वीडन मे अध्यायन किया है | जहाँ उन्होंने SIDA फैलोशिप की थी | कोल्हापूर मे राजाराम कॉलेज व्दारा उन्हे दक्षिणा फैलेाशिप से सम्मानित किया गया |


कार्य :


        अरुण निगवेकर एक भारतीय भौतिक विज्ञानी और शिक्षक है | वह 1998 से 2000 तक पुणे विश्वाविदयालय के उप-कुलपति और 2000 से 2005 तक विश्वाविदयालय अनुदान आयोग UGC के उपाध्यक्ष और चेअरपर्सन थे | निगवेकर ने संस्थापक निदेशक के रुप मे राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद NAAC निकाय की स्थापना मे मदद की थी | भारत के पूर्व राष्ट्रपती एजी जे कलाम ने उन्हे भारत मे गुणवत्ता पूर्ण शिक्षक का जनक कहा था |


        उन्होने उच्च् शिक्षा के प्रोघोगिकी और अंतर्राष्ट्रीयकरण के उपयोग को आगे बढाने मे मदद की थी | उन्होंने उच्च् शिक्षामे गुणवत्ता की अवधारणा पर प्रकाश डाला था | उन्होंने पुणे विश्वाविघालय के कुलपति के रुप मे कार्य किया था | उनके पास अपने क्रेडिट के लिए 70 शोध प्रकाशन है | वह 1977 में पुणे विश्वाविघालय मे सामृग्री विज्ञान मे प्रोफेसर बने | उन्होंने 1980 मे पुणे मे भौतिकी मे उन्न्त अध्यायन केंद्र की स्थापना उन्होंने शैक्षिक मीडिया अनुसंधान केंद्र के निदेशक के रुप मे सेवा की और 1990 के दशक मे पुणे विश्वाविघालय मे संचार विज्ञान विभाग की स्थापना की थी | वह UGC 2000-2005 दसवी योजना मे उच्च् शिक्षा के लिए एक रणनीती तैयार करने मे मदद की थी |


        वह 1993-1996 तक युजीसी के सदस्या रहे थ | और यूजीसी प्रशासन के विकेंद्रीकरण जैसे सुधारों की शुरुआत की थी | वह राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद यूजीसी की स्वायत संस्था के संस्थापक निर्देशक थे | वह 1980 के दशक मे यूके मे यॉर्क विश्वाविदयालय और कनाडा मे पश्चिमी ओयरियो विश्वाविदयालय मे विजिटिंग प्रोफेसर थे | वह फिजिक्सा एजूकेशन जर्नल के संस्थापक संपादक थे | वह एक स्थायी सदस्या है और यूनस्को संगठन एशियाई भौतिकी शिक्षा नेटवर्क के उपाध्यक्ष थे | उन्होंने एशियाई भौतिकी शिक्षा नेटवर्क के उपाध्याक्ष थे | उन्होंने भारतीय उच्च् शिक्षा मे गुणवत्ता को पहचानने के लिए उपकरणों और कार्यप्रणाली को विकसित किया, जो की इंटरनेशनल एजुकेशन फॉर क्वालिटी एश्योंरेंस इन हायर एजुकेशन INQUAHE व्दारा समर्थित था | वे कनाडा मे दुरस्था शिक्षा परिषद के सदस्या और राष्ट्रमंडल शिक्षा के सलाहकार थे | 


पूरस्कार और सम्मान :


1) उन्हें तिलका मांझी विश्वाविदयालय नागार्जुन विश्वाविदयालय, गुरु नानक देव विश्वाविदयालय, जगदगुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वाविदयालय, कालीकट विश्वाविदयालय और पोट्री श्रीरामुलु विश्वाविदयालय व्दारा मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की गई थी |

2) उन्होंने फिया फाउंडेशन पुरस्कार, यूनेस्को सम्मान, स्वामी विवेकानंद पूरस्कार, एडवोकेट डी आर नागकर पूरस्कार, शिरोमणि पूरस्कार और दिल्ली रतन पूरस्कार जीता था |

3) निगवेकर फाइनेशियल फ्रॉनिकल, सकाल एक मराठी समाचार पत्र, टाइम्सा ऑफ इंडिया और द हिंदू मे दिखाई दिए है |

4) वह सिविल सेवा मुख्या परिक्षा के मौजुदा संरचना की समीक्षा करने और विभिन्ना परिवर्तनों का सुझाव देने क लिए संघ लोक आयोग यूपीएससी व्दारा नियुक्त विशेषज्ञों की समिती का प्रमूख है | 

5) निगवेकर महाराष्ट्रा राजय सरकार व्दारा ऐतिहासिक झाील लोनार के लिए समग्ना संरक्षण योजना तैयार करने और कार्यान्वित करने के लिए बनाई गई समिति के प्रमुख है | 

6) उन्हें उच्च् शिक्षा महासंघ और सूर्यदत्त् संस्थान के लिए लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड मिला है |